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Dehradun: सूर्यधार झील परियोजना के निर्माण में जांच समिति की रिपोर्ट आई सामने, वित्तीय अनियमितता पर ईई निलंबित

Thu, 13 Oct 2022 04:44 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

27 अगस्त 2020 को सिंचाई मंत्री महाराज ने सूर्यधार झील का निरीक्षण किया तो कई अनियमितताएं सामने आईं। उन्होंने प्रकरण की जांच के आदेश दिए। जांच में इस अनियमितता के लिए अधिशासी अभियंता प्रथम दृष्टया जिम्मेदार पाए गए।
 
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सस्पेंड - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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डोईवाला विधानसभा क्षेत्र में सूर्यधार झील परियोजना के निर्माण में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने पर तत्कालीन अधिशासी अभियंता डीके सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सचिव सिंचाई हरिचंद्र सेमवाल की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किये गए हैं।

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सूर्यधार झील परियोजना के निर्माण की घोषणा 29 जून 2017 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने की थी। यह उनके ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल था। शासन ने 22 दिसंबर 2017 परियोजना के लिए 50.24 करोड़ की प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति दी थी। 27 अगस्त 2020 को सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने सूर्यधार झील का निरीक्षण किया तो कई अनियमितताएं सामने आईं। उन्होंने प्रकरण की जांच के आदेश दिए।

प्रशिक्षण सेंटर फॉर ट्रेनिंग एंड रिसर्च इन फाइनेंशियल एडमिनिस्ट्रेशन के निदेशक जीवन चंद्र जोशी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने 20 सितंबर को अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी। जिसमें योजना के निर्माण में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि की गई थी। डीके सिंह उस वक्त अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड देहरादून के पद पर तैनात थे और योजना का काम देख रहे थे। डीके सिंह इन दिनों चंपावत में तैनात हैं। निलंबन की अवधि के दौरान वह कार्यालय प्रमुख अभियंता, सिंचाई विभाग से संबद्ध रहेंगे। 
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यह था मामला
सूर्यधार झील योजना की आरंभिक लागत 62 करोड़ रुपये थी, लेकिन स्वीकृत राशि से 12 करोड़ रुपये अधिक खर्च कर दिए गए। बांध की ऊंचाई पहले सात मीटर तय की गई थी। बाद में इसे बढ़ाकर 10 मीटर कर दिया गया। शासन से इसकी अनुमति भी नहीं ली गई। इस पर सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने प्रश्न खड़े किए और जांच के आदेश दिए। जांच में इस अनियमितता के लिए अधिशासी अभियंता प्रथम दृष्टया जिम्मेदार पाए गए।

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