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अब पानी से जलेगा घर का चूल्हा

Sat, 22 Nov 2014 03:21 PM IST
विनय बहुगुणा/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
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सोचिए अगर घर में उपलब्ध पानी से ही घर का चूल्हा जलने लगे तो जिंदगी कितनी आसान बन जाएगी। इस सोच को अमलीजामा पहनाने में जिले के एक फार्मासिस्ट चंद्रकांत बेंजवाल को काफी हद तक कामयाबी हासिल हुई है।
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एक छोटे से कमरे मे किए गए प्रयोग में बेंजवाल ने पानी से हाईड्रोजन को अलग कर उसकी ऑक्सीजन के साथ क्रिया कराकर ऊर्जा (ऊष्मा के रूप में) पैदा करने वाली करने वाली गैस तैयार की है।

यह गैस विद्युत उपकरणों को जलाने के साथ ही अधिक मात्रा में संग्रहीत करने पर रसोई गैस के रूप में उपयोग में लाई जा सकती है।

आपदा प्रभावित केदारघाटी के रांसी गांव में बतौर फार्मासिस्ट काम करने वाले चंद्रकांत बेंजवाल का प्रयोग प्रारंभिक चरण में सफल रहा है और वह इस प्रयोग के जरिए पेट्रोमैक्स में प्रयोग होने वाले मेंटल को जलाकर रौशनी पैदा करने में कामयाब रहे हैं।
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बेंजवाल का कहना है कि वैकल्पिक और प्रदूषणमुक्त ऊर्जा के रूप में इसे बड़े पैमाने पर उपयोग में लाया जा सकता है। इसके साथ ही हाईड्रोजन से पैदा होने वाली ऊर्जा सामान्य रसोई गैस के मुकाबले 20 से 25 तक प्रतिशत तक सस्ती पड़ सकती है।

ऐसी अलग की जाती है हाइड्रोजन

प्लास्टिक के एक बर्तन में आधा पानी भरा जाता है। इसे दूसरे प्लास्टिक के बर्तन से ढक दिया जाता है। इसके बाद सोडियम सहित अन्य धातुओं के साथ पानी से क्रिया कराई जाती है। इससे काफी मात्रा में हाईड्रोजन गैस उत्पन्न होती है जिसे कंटेनर में जमा कर लिया जाता है।

हाईड्रोजन गैस हल्की और ज्वलनशील होती है। बेंजवाल ने बताया कि जब पानी से अलग की गई हाईड्रोजन गैस को वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाया जाता है तो ऊष्मा पैदा होती है। इसी सिद्धांत पर उन्होंने मेंटल को जलाने में कामयाबी हासिल की।

इस क्रिया में ऊष्मा के अलावा पानी बनता है इस कारण इससे प्रदूषण न के बराबर होता है। इस पूरी प्रक्रिया को आसानी समझाने के लिए बेंजवाल बताते हैं कि जैसे वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन की मदद से लकड़ी जलती है ठीक वैसे ही मेंटल भी जल उठता है।

यूं होती है हाईड्रोजन से ऊर्जा उत्पन्न
रसायन विज्ञान के प्रवक्ता दिनेश चौकियाल का कहना है कि सोडियम मेटल की जल के साथ क्रिया में एनओएच (सोडियम हाइड्रोक्साइड) तीव्र गति से हाईड्रोजन गैस उत्पन्न करता है।

ऑक्सीजन के साथ क्रिया कराने पर हाईड्रोजन जलने लगती है, जिससे ऊष्मा पैदा होती है। हाईड्रोजन से उत्पन्न इस ऊष्मा रूपी ऊर्जा का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है।
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बेंजवाल के प्रयोग को सीएम ने भी सराहा

7  से 11 नवंबर तक अगस्त्यमुनि में आयोजित मंदाकिनी शरदोत्सव एवं कृषि औद्योगिक विकास मेले में पहुंचे प्रदेश के सीएम हरीश रावत ने स्टालों के निरीक्षण के दौरान चंद्रकांत बेंजवाल के प्रयोग को भी देखा और इसकी सराहना की।

2004 में करा चुके हैं पेटेंट
चंद्रकांत बेंजवाल 11 मई 2004 को समुद्र की लहरों से बिजली बनाने का एक फार्मूला तैयार कर उसका पेटेंट भी करवा चुके हैं।

इस तरह हाईड्रोजन को अलग करके ऊर्जा पैदा करना संभव है। छोटे और निजी स्तर पर हो रहे ऐसे प्रयोग महत्वपूर्ण हैं। सरकार को ऐसे प्रयोगों को मदद करनी चाहिए जिससे इनका उपयोग बड़े पैमाने पर हो सके।
- डॉ. पारुल पुरोथी, प्रोफेसर और वैज्ञानिक बायोटेक विभाग, आईआईटी रुड़की

दुनिया के कई देशों में हाइड्रोजन को ईधन के रूप में इस्तेमाल करके कार चलाने से लेकर बिजली पैदा करने तक अलग-अलग तरह के प्रयोग हो रहे हैं। अंतरिक्षयानों में हाइड्रोजन गैस को ईधन की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

इसके अलावा हाइड्रोजन फ्यूल सेल के जरिए वाहनों को चलाने की कवायद भी जारी है। हाल ही में जापान की कार बनाने वाली कंपनी ने हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली कार पेश करने की घोषणा की है।
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