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Women’s Day 2024: जायके के साथ सेहत भी बना रहा पूजा के मिलेट्स का 'फास्ट फूड', युवा और विदेशी हैं मुरीद

सार

International Women's Day 2024: चौसा भात, मंडुवे की रोटी, झंगोरे की खीर तो आपने खाई ही होगी, लेकिन युवाओं में बढ़ रहे फास्ट फूड के क्रेज को देखते हुए पूजा ने इसका हेल्दी वर्जन तैयार किया।
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उत्तराखंड की पहाड़ी रसोई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हार-जीत के बीच जो मुश्कि़ल लकीर है, उस लकीर को तू मिटा दे...तुझसे ना हो पायेगा जैसी जो तेरी सोच है, इस सोच को तू मिटा दे। इसी हौसले के साथ आगे बढ़ीं देहरादून की पूजा तोमर ने संघर्षों से जूझकर ऐसा मुकाम पाया कि अब विदेशी भी उनके हुनर के मुरीद हैं। अपनी मां के एक आइडिया से 39 वर्षीय पूजा ने 'पहाड़ी रसोई' शुरू की, जिससे उनकी खुद की पहचान तो बढ़ ही रही है, साथ ही उत्तराखंड के व्यंजनों को भी विदेशों तक पहचान मिल रही है। 

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चौसा भात, मंडुवे की रोटी, झंगोरे की खीर तो आपने खाई ही होगी, लेकिन युवाओं में बढ़ रहे फास्ट फूड के क्रेज को देखते हुए पूजा ने इसका हेल्दी वर्जन तैयार किया। मंहुवे के गोलगप्पे, झंगोरे की इडली, मंडुवे का पीजा, कंडाली के कबाब, कंडाली की चाय, मंडुवे के मोमोज़ और डोसा आज युवाओं का जायका बढ़ा रहा है।

पूजा आईटी पार्क के पास अपनी पहाड़ी रसोई चलाती हैं। इसके साथ ही कई सरकारी विभागों के आयोजनों में कैटरिंग का काम भी करती हैं। खादी ग्रामोद्योग, महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, नाबार्ड, मुख्यमंत्री आवास के आयोजनों में भी उनका खाना सर्व किया जाता है। 
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ऐसे आया आइडिया

पूजा ने बताया कि उनकी मां महिलाओं के लिए सोयाबीन की बर्फी बनाती थीं। उनकी मां के देहांत के बाद जब पूजा की दो बेटियां हुईं तो जिम्मेदारी बढ़ गई। आय का जरिया नहीं था तो उन्होंने मां के आइडिया को अपनाते हुए पहाड़ के मोटे अनाज को प्रमोट करने की योजना बनाई। जिसके बाद उन्होंने मोटे अनाज से फास्ट फूड को नया जायका दिया।

अन्य महिलाओं को दिया रोजगार

पूजा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2009 में सरस्वती जाग्रती स्वयं सहायता समूह की शुरुआत की। तब उन्होंने करीब 50 महिलाओं को अपने साथ जोड़ा। इसके बाद इंदिरा अम्मा कैंटीन चलाई और इसके बाद 2014 में पहाड़ी रसोई खोली। उनके समूह से जुड़ी महिलाएं अब अपना कारोबार भी कर रही हैं। वहीं, उनके साथ 50 महिलाएं आज भी काम कर रही हैं।
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शैफ भी खुद और गल्ला भी संभाल रहीं मातृशक्ति

पूजा की रसाई की खास बात ये है कि उनकी रसोई में शैफ भी महिलाएं हैं, खाना परोसती भी महिलाएं ही हैं। इतना ही नहीं गल्ला भी महिलाएं ही संभालती हैं। 

इन डिश के मुरीद हैं विदेशी

बताया कि उनकी खास डिश अलसी के लड्डू, मंडुवे की नमकीन, बिस्किट और भांग के नमक की विदेशों तक डिमांड है। अमेरिका से भी उनकी इस डिश के ऑर्डर आते हैं। हाल ही में उन्हें अमेरिका से अरसे और रोट का भी ऑर्डर मिला है। कई विदेशी तो ऐसे भी हैं जो जब भी उत्तराखंड आते हैं तो यहीं पहाड़ी खाना खाते हैं। 

देश के कई राज्यों से आ रहे ऑर्डर

बताया कि पहाड़ का यह जायका केवल यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें दिल्ली, मुंबई समेत कई राज्यों से भी बड़े फूड फेस्टिवल और आयोजनों में पहाड़ी खाने का ऑर्डर मिल रहा है।
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