सनातन धर्म के प्रतीक अखाड़ों ने भी महिला सशक्तिकरण और सतत विकास की अवधारणा नया आयाम दिया। अखाड़ों में महिला महामंडलेश्वर बनाने की रवायत श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा ने शुरू की थी।
संतोष पुरी माता को सबसे पहली महामंडलेश्वर बनाया गया था। आज अखाड़ों की महिला महामंडलेश्वर बराबरी के दर्जे के साथ कुंभ का शाही स्नान करतीं हैं। सनातन धर्म की रक्षा और प्रचार प्रसार के लिए 13 अखाड़ों का गठन किया गया था।
अखाड़ों में महामंडलेश्वर बनाए जाने की परंपरा काफी पुरानी है। महामंडलेश्वर सेवा कार्यों से धर्म का प्रचार प्रसार करते हैं। उल्लेखनीय कार्य करने वाले महामंडलेश्वरों को अखाड़ों की कार्यकारिणी और न्यायपालिका में भी स्थान दिया जाता है।
वहीं कुंभ मे आचार्य महामंडलेश्वर के बाद महामंडलेश्वर के स्नान की परंपरा है। पहले पुरुषों को ही महामंडलेश्वर बनाया जाता है। लेकिन बाद में अखाड़ों ने महिला को भी बराबरी दर्जा देने की एक सराहनीय शुरुआत की।
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हरिद्वार में जूना, अग्नि और किन्नर अखाड़े की पेशवाई
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
मौजूदा समय में 13 में से अधिकांश अखाड़ों में 60 से अधिक महिला महामंडलेश्वर हैं। इनमें से सबसे अधिक महामंडलेश्वर श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े में हैं।
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हरिद्वर में निकली किन्नर अखाड़े की पेशवाई
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
जूना अखाड़े ने किन्नर अखाड़े का अपना सहयोगी बनाकर भी समाज में एक अनुकरणीय पहल की थी। कुंभ के दौरान आचार्य महामंलेश्वरों के महिला महामंडलेश्वर भी स्नान करतीं हैं।
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हरिद्वार में जूना की पेशवाई
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
वहीं धार्मिक कार्यों, सेवा कार्यों के साथ राजनीतिक क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।