शहरी विकास निदेशालय द्वारा सामूहिक बीमे की बढ़ी नई प्रीमियम दरें स्वीकार न करने से भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने राज्य के निकाय कर्मियों की जीएसएलआई और जीआई पालिसी अप्रैल 2014 से खत्म (कालातीत) कर दी हैं।
इस तिथि के बाद सेवानिवृत्त और मृतक आश्रितों को बीमा लाभ मिलना बंद हो गया है। एलआईसी ने नई दरें स्वीकार करने के लिए शहरी विकास निदेशालय को 25 मार्च 2015 तक का समय दिया था, पर निदेशालय ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया।
प्रदेश के सभी जिलों के निकाय कर्मियों के सामूहिक बीमा के लिए फरवरी 2014 तक ग्रुप एंड सेविंग लाइफ इंश्योरेंस (जीएसएलआई) की 50 रुपए और जनरल इंश्योरेंश (जीआई) की दरें 25 रुपए प्रतिमाह निर्धारित थीं। इस पर कर्मचारी को एक लाख रुपए तक क्लेम मिलता था।
एलआईसी ने 2014-15 से जीएसएलआई की नई दर 164 और जीआई 88 रुपए प्रतिमाह कर दिया। इसका क्लेब भी एक लाख रुपए से बढ़ाकर सवा लाख रुपए कर दिया गया। एलआईसी ने बढ़े हुए प्रीमियम पर बीमे के लिए शहरी विकास निदेशालय को पत्र जारी कर सहमति मांगी थी।
निदेशालय ने निर्धारित समय पर बीमा कंपनी को कोई उत्तर नहीं दिया। बढ़ी राशि पर प्रीमियम जमा न होने से एलआईसी ने कार्मिकों की बीमा पॉलिसी अप्रैल 2014 से खत्म कर दी।