मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दो दिन तक शहर में गश्त कर व्यवस्था को देखा, सर्दी से आम जनमानस को बचाने की तैयारी परखी लेकिन किसी आला अधिकारी पर इस बात का असर नहीं पड़ा।
संबंधित तैयारियों का जायजा नहीं लिया
किसी विभाग के सचिव ने इस सर्दी के मौसम में अपने विभाग से संबंधित तैयारियों का जायजा नहीं लिया। जिलों में तैनात अफसर भी तब तक सोए रहे जब तक सीएम सड़क पर नहीं आए।
यूपी के जमाने से एक अधिसूचना आज तक विद्यमान है। उसके अनुसार पूरी यूपी में अधिक सर्दी या गर्मी आने पर स्वत: ही काम शुरू हो जाता है लेकिन राज्य के कई जिलाधिकारी अलाव जलवाने के लिए भी शासन के निर्देश का इंतजार करते हैं।
यही वजह थी कि मुख्यमंत्री को सड़क पर आकर सर्दी में अलाव जलाने की व्यवस्था देखनी पड़ी। मुख्यमंत्री तो सड़क पर उतरे मगर साहब लोग अब भी सोए रहे। कमिश्नर का पता नहीं, डीएम व मुख्य नगर अधिकारी नगर निगम तब जागे जब सीएम सुबह सामने खड़े मिले।
क्यों पड़ी सीएम को कलक्ट्रेट जाने की जरूरत
प्रदेश में व्यवस्था पूरी तरह से लचर हो गई है। ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय (कलक्ट्रेट) के परंपरागत निरीक्षण की प्रथा भी प्रभावी नहीं रही। यही वजह है कि मुख्यमंत्री सुबह सीधे कलक्ट्रेट गए और कई कार्यालयों का निरीक्षण किया।
यूपी में आज भी राजस्व परिषद के सदस्य नियमित रूप से कमिश्नरी मुख्यालय व कलक्ट्रेट के संयुक्त कार्यालय का निरीक्षण करते है।
मंडलायुक्त किसी एक कलक्ट्रेट, एक तहसील, एक ब्लॉक, एक गांव व एक पुलिस स्टेशन का निरीक्षण करता है और डीएम को तहसील, ब्लॉक, थाना व गांव का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट राजस्व परिषद को भेजनी होती है, लेकिन उत्तराखंड में यह व्यवस्था अब खत्म होने के कगार पर है।
धड़ल्ले से चालू हैं अफसरों के शिविर कार्यालय
उच्च न्यायालय की सख्ती का असर भी नहीं। राज्य सरकार ने ढंग से सख्ती की नहीं, इसलिए अभी तक मंडलायुक्त, सीसीएफ (मुख्य वन संरक्षक), डीआईजी रेंज व रजिस्ट्रार सहकारी समितियों के कार्यालय अपने मूल स्थान से हटाकर शिविर कार्यालय के रूप में देहरादून में चल रहे हैं।
उच्च न्यायालय आदेश कर चुका लेकिन सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगने के अलावा कुछ नहीं किया। यह राज्य सरकार की सबसे बड़ी चूक भी है।
पुरानी हुई बात, गांव में नहीं बिताई रात
जिलों के प्रभार मिलने के बाद सचिव व प्रमुख सचिवों में से ज्यादातर ने अपने जिलों का भ्रमण नहीं किया। कुछ गए तो औपचारिकता पूरी करके लौटे। उन्होंने जिले को लेकर क्या रिपोर्ट दी, उस रिपोर्ट का क्या हुआ, विकास योजनाओं की क्या प्रगति पाई। इन सब बिंदुओं पर कोई बात नहीं हुई।
सीएम व सीएस दोनों कह चुके हैं कि मंडल व जिलों में तैनात अफसरों के अलावा प्रभारी सचिव भी अपने जिलों में एक रात गांव में बिताएंगे। लेकिन रात तो दूर अभी तक किसी ने एक दिन भी गांव में नहीं बिताया।