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अपने बच्चों की चिंता में दूसरों को छोड़ा 'बेसहारा'

Mon, 05 Jan 2015 11:10 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के स्कूलों में नौनिहालों को पढ़ा रही शिक्षिकाओं को अपने बच्चों की चिंता है, लेकिन दूसरों की परवाह नहीं।
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करीब चार हजार शिक्षिकाएं अवकाश पर
शायद यही वजह है कि प्रदेश की करीब चार हजार शिक्षिकाएं बाल्य देखभाल अवकाश (सीसीएल) पर चली गई हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह आंकड़ा कुल शिक्षिकाओं का करीब नौ फीसदी है।

यह हाल तब है जबकि प्रदेश में 70 फीसदी से अधिक महिला शिक्षक हैं। इससे न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है, बल्कि बोर्ड परीक्षाएं भी प्रभावित होंगी।
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विभागीय सूत्रों के मुताबिक बड़ी संख्या में शिक्षिकाओं के सीसीएल पर जाने से पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। खास तौर ऐसे स्कूलों में जहां शिक्षिकाएं डेढ़ से दो साल की छुट्टी पर चली गई हैं। राज्य में 10 मार्च से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। इससे पहले फरवरी में गृह परीक्षाएं होनी हैं।

शिक्षा विभाग अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश भर में इन दिनों 832 शिक्षिकाएं बाल्य देखभाल अवकाश पर हैं। ये ऐसी हैं, जिनका मुख्य शिक्षा अधिकारी स्तर से अवकाश मंजूर है। इसके अलावा खंड शिक्षा अधिकारी और दूसरे स्तर से भी बड़ी संख्या में सीसीएल को मंजूरी दी गई है।

अवकाश स्वीकृत कराने के लिए कुछ शिक्षिकाओं ने बच्चों का मेडिकल बनवाया है। जबकि कुछ के सीसीएल के लिए विभाग को हैरान कर देने वाले आवेदन भी दिए हैं। इनका कहना है कि उनके बच्चे की उम्र 18 वर्ष पूरी होने वाली है। इससे पहले उनका अवकाश मंजूर किया जाए।

42 हजार से अधिक हैं शिक्षिकाएं
प्रदेश में 60 हजार से अधिक शिक्षक हैं। इसमें 42 हजार से अधिक शिक्षिकाएं हैं। सूत्रों के मुताबिक चार हजार से अधिक शिक्षिकाएं इन दिनों सीसीएल पर हैं।

न्यूनतम 15 और अधिकतम 730 दिन का अवकाश
शिक्षिकाओं को न्यूनतम 15 दिन और अधिकतम 730 दिन का बाल्य देखभाल अवकाश मिलता है। यह अवकाश बच्चों की परीक्षा और बीमारी के दौरान मिलता है।
 
शिक्षिकाओं को सीसीएल देने का प्रावधान हैं। चूंकि यह नियम है, हम चाहकर भी इसमें कुछ नहीं कर सकते।
- आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक

वर्षवार बांटकर दे सकते हैं अवकाश
विभागीय सूत्रों की मानें तो सीसीएल शिक्षिकाओं के लिए एक सुविधा है, न कि अधिकार। पूरे सेवाकाल में उन्हें 730 दिन की सीसीएल मिलती है। ऐसे में एक साथ डेढ़ से दो साल की छुट्टी की जगह इसे वर्षवार बांटकर दिया जा सकता है।
 
मंजूरी में भी सिफारिश का खेल
शिक्षा विभाग के लोगों के मुताबिक सीसीएल दिए जाने में खेल चल रहा है। सिफारिशी लोगों की सीसीएल मंजूर कर ली जाती है, जबकि बाकी को टरका दिया जाता है। ऐसे में चहेतों को लड्डू मिल जाता है, लेकिन वास्तविक जरूरतमंद लाभ से महरूम रह जाता है।
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मैंने अफसरों की बैठक में साफ कहा है कि अब ऐसा नहीं चलेगा। कुछ शिक्षिकाएं छह माह की छुट्टी पर चली गई हैं। मामले में अफसरों को कोई रास्ता निकालने के लिए कहा गया है।
- मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री
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