इस बार आम आदमी को आम खरीदने के लिए जेब हल्की करनी पड़ेगी। क्योंकि आम में मैंगो हापर (चैपा कीट) का प्रकोप बढ़ गया है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इससे 30 फीसदी तक फसल बर्बाद हो गई है। इससे आम की मात्रा और किमत दोनों पर प्रभाव पड़ेगा।
उत्तराखंड में देहरादून, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, हरिद्वार, अल्मोड़ा, पौड़ी, टिहरी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में 40191 हेक्टेयर में आम की बागवानी की जाती है। जिससे हजारों किसानों की आजीविका जुड़ी है, लेकिन बारिश से आम की फसल पर रोग बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो इससे 20 से 30 फीसदी फसल प्रभावित हुई है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएस बिष्ट के मुताबिक आम में फरवरी व मार्च में बौर आने लगता है, लेकिन बारिश से तापमान में कमी के चलते न सिर्फ बौर 20 से 25 दिन देरी से आया है, बल्कि उसमें मैंगो हापर और पाउड्री मिल्डयू रोग फैलने का खतरा पैदा हो गया है।