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इस बार आम आदमी नहीं खा पाएगा आम!

Fri, 17 Apr 2015 04:13 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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इस बार आम आदमी को आम खरीदने के लिए जेब हल्की करनी पड़ेगी। क्योंकि आम में मैंगो हापर (चैपा कीट) का प्रकोप बढ़ गया है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इससे 30 फीसदी तक फसल बर्बाद हो गई है। इससे आम की मात्रा और किमत दोनों पर प्रभाव पड़ेगा।
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उत्तराखंड में देहरादून, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, हरिद्वार, अल्मोड़ा, पौड़ी, टिहरी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में 40191 हेक्टेयर में आम की बागवानी की जाती है। जिससे हजारों किसानों की आजीविका जुड़ी है, लेकिन बारिश से आम की फसल पर रोग बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो इससे 20 से 30 फीसदी फसल प्रभावित हुई है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएस बिष्ट के मुताबिक आम में फरवरी व मार्च में बौर आने लगता है, लेकिन बारिश से तापमान में कमी के चलते न सिर्फ बौर 20 से 25 दिन देरी से आया है, बल्कि उसमें मैंगो हापर और पाउड्री मिल्डयू रोग फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
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ऐसे करें बचाव

मैंगो हापर में कीट आम के फूल से रस चूसने लगता है, जिससे फूल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। पाउड्री मिल्ड्यू के प्रकोप से फूल में सफेद रंग के चूर्ण जमा होने लगते हैं।

उद्यान एवं कृषि विभाग के अधिकारियों व वैज्ञानिकों से मिलकर उनकी सलाह पर पेड़ों पर दवा का छिड़काव करें। डा.एसएस सिंह के मुताबिक पेड़ों पर डाइनोकैप व थायोमिथेक्सम का छिड़काव कर सकते हैं।

काले पड़ गए गेहूं
बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल काली पड़ गई है। उमेदपुर गांव के किसान वाणी विलास गैरोला के मुताबिक उनकी चार बीघा गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। क्षेत्र में अन्य किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।

गुरुवार हुई बारिश ने रही सही कसर भी पूरी कर दी, लेकिन शासन, प्रशासन का कोई भी अधिकारी किसानों की सुध लेने नहीं पहुंचा न ही किसानों को किसी तरह की राहत मिल पायी है।
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