फसलों पर होने वाला हानिकारक कीटों का हमला रोकने के लिए प्रयोग में आने वाले रासायनिक कीटनाशक न केवल जमीन बल्कि इंसानों के लिए भी नुकसानदायक साबित हो रहे हैं।
नुकसान पहुंचा रहे रसायन
बेशक हमें कीटरहित सब्जियां मिल जाती हैं लेकिन इन पर छिड़के गए रसायन नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में कीटनाशकों से बचाव का नया उपाय खोजा है डीएवी कालेज के प्रोफेसर पुष्पेंद्र कुमार शर्मा ने।
कालेज के जूलॉजी विभाग में कार्यरत डा.पुष्पेंद्र ने देहरादून में चार जगहों पर दो साल तक शोध किया। उन्होंने विभिन्न प्रजातियों के 1558 कीट एकत्र किए। इनमें से 10 प्रजातियां ऐसी थीं जो फसलों के लिए नुकसानदायक हैं और तीन प्रजातियां ऐसी सामने आईं जोकि परभक्षी हैं।
यानी इन दस प्रजातियों के लिए विनाशक। डा. पुष्पेंद्र ने यह अध्ययन गेहूं और सरसों पर किया। बताया कि यह तरीका पहले चीन में कुछ जगहों पर इस्तेमाल किया गया था लेकिन रासायनिक कीटनाशकों के प्रभाव के चलते परवान नहीं चढ़ पाया। डा. पुष्पेंद्र अब इस तरीके का भारतीय कनेक्शन तलाश रहे हैं, क्योंकि पुरातन आश्रम पद्धति में कई जगहों पर इस तरीके का जिक्र हुआ है
ऐसे होगा इस्तेमाल
हानिकारक कीटों को खाने वाले परभक्षी कीटों को एक साथ पैदा किया जाता है। कीटों को उनकी जरूरत के मुताबिक वातावरण में तैयार करने के बाद पकड़कर उस जगह छोड़ते हैं जहां हानिकारक कीटों का प्रभाव है।
ये परभक्षी इन कीटों को खा जाते हैं, जिससे फसल बर्बाद होने से बच जाती है। अभी यह शोध प्राथमिक स्टेज में है। डा. पुष्पेंद्र ने उम्मीद जताई है कि आगामी कुछ ही वर्षों में यह प्रक्रिया प्रगति करेगी।
यह होगा फायदा
रासायनिक कीटनाशक सब्जियां या फल धुलने के बावजूद अपना असर छोड़ जाते हैं। इससे मनुष्य जाति को भारी नुकसान हो रहा है। वैज्ञानिक तौर पर यह बात साबित हो चुकी है कि रासायनिक कीटनाशकों की वजह से उपजाऊ जमीनों का भी भारी नुकसान हुआ है। कीटों से ही कीटों का नाश करने का यह तरीका निश्चित तौर पर रासायनिक दुष्प्रभावों से बचाएगा।