उत्तराखंड में इंडियन मुजाहिदीन बाघों का भी दुश्मन बन गया है। इसके लिए उसने बावरिया गिरोह को अपना हथियार बना लिया है।
हड्डी और खाल की तस्करी
उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सहित अन्य प्रदेशों में बाघों का शिकार कर बिहार के जसनगर स्थित नेपाल बॉर्डर से हड्डी और खाल की तस्करी की जा रही है। चार नवंबर को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा से गिरफ्तार किए गए बावरिये के इस खुलासे ने उत्तराखंड जंगलात महकमे के अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं।
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सूत्रों का कहना पिछले दो साल से इंडियन मुजाहिदीन की ओर से देश के बाघों को शिकार कराने के लिए सुपारी दी जा रही है। इसके लिए बावरियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। क्योंकि, बावरिया ही एक ऐसा समूह है जो बाघों का शिकार करने में एक्सपर्ट माना जाता है। मोटी रकम मिलने की लालच में वे विभिन्न राज्यों में लगातार बाघों को खड़का लगाकर मार रहे हैं।
अधिकारियों की हुई बैठक
इस दौरान बाघों की खाल और हड्डियों की तस्करी के लिए उत्तराखंड की सीमा के बजाय बिहार का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब पिथौरागढ़ की सीमा पर सख्ती के बाद गिरोह ने अपनी रणनीति बदल दी है।
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इस खुलासे के बाद पिछले सप्ताह ही बिहार पुलिस और खुफिया एजेंसियों के साथ सेंट्रल वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश सहित अन्य कई राज्यों के जंगलात महकमे से जुड़े अधिकारियों की बैठक हुई।
बैठक में बावरियों और इंडियन मुजाहिदीन के नेटवर्क को तोड़ने पर चर्चा की गई। इसके लिए बिहार पुलिस और खुफिया एजेंसियों की मदद मांगी गई है, जिससे बावरियों और इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी की जा सके।
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