यह भूमि जल्द ही मंडी समिति के नाम स्थानांतरित कर दी जाएगी। बोर्ड का दावा है कि यह ऑर्गेनिक मंडी देश की पहली मंडी होगी। जहां पर सिर्फ जैविक उत्पादों का कारोबार होगा। यहां पर किसानों से ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन उत्पाद की खरीद होगी। इसके साथ ही आढ़तियों का भी प्रमाणीकरण भी किया जाएगा।
80 हजार किसान कर रहे 176279 क्विंटल जैविक फसलों का उत्पादन
प्रदेश के नैनीताल, पौड़ी, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली जिले के किसानों के अलावा जैविक उत्पादन परिषद के 500 क्लस्टरों में जैविक खेती हो रही है। परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत करीब 80 हजार किसान ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं।
ये किसान मंडुवा, गहत, बासमती चावल, मक्की, चौलाई, सोयाबीन, काला भट्ट, रामदाना, राजमा, गेहूं, मसूर, सरसों के अलावा सब्जी व मसाले का उत्पादन कर रहे हैं। प्रदेश में 176279 क्विंटल जैविक कृषि उत्पादों का उत्पादन हो रहा है। जिसकी मार्केट वैल्यू करीब 4254 लाख रुपये हैं।
मंडी बोर्ड का प्रयास है कि प्रदेश में ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को बेहतर मार्केटिंग की सुविधा मिले। इस क्रम में हल्द्वानी में प्रदेश व देश की पहली जैविक मंडी स्थापित की जाएगी। जहां किसानों को अपने ऑर्गेनिक उत्पाद बेचने के लिए बाजार मिलेगा। वहीं, जैविक उत्पादों का कारोबार करने वाले व्यापारियों को भी एक ही जगह पर उत्पाद उपलब्ध होंगे।
- गजराज सिंह बिष्ट, अध्यक्ष, मंडी बोर्ड