बीआरओ एक सप्ताह पूर्व ट्रेन से इन 230 मजदूरों को रुड़की लाया। रुड़की से सभी मजदूरों को देहरादून के लालतप्पड़ में लाकर सात दिन के लिए इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन कर दिया गया। इसके बाद बीआरओ ने इन मजूदरों को सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचाने के लिए परिवहन निगम से बसों की मांग की। इस पर निगम ने 11 बसें उपलब्ध कराईं। मंगलवार को सभी मजदूर सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचा दिए गए।
देश के काम आने का जज्बा
जब मजदूरों को रोडवेज की बसों में बैठाया जा रहा था तो उनके भीतर देश के काम आने का जज्बा दिखाई दिया। मजदूरों का कहना था कि वैसे तो कोरोना के चलते वह अपने घर में सुरक्षित थे लेकिन देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर निर्माण कार्य इससे ज्यादा जरूरी है। इसलिए वे अपने बच्चों को छोड़कर यहां आ गए।
बीआरओ जिन 230 मजदूरों को निर्माण कार्यों के लिए झारखंड से लाया था, उन्हें निगम की बसों से चीन सीमा से सटे जोशीमठ, बद्रीनाथ से सटे माणा गांव तक पहुंचा दिया गया है। सभी मजदूर सकुशल पहुंच गए हैं।
-रणवीर सिंह चौहान, प्रबंध निदेशक, परिवहन निगम