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भारत-चीन विवाद: चीन बॉर्डर पर निर्माण कार्यों के लिए रातोंरात पहुंचाए 230 मजदूर, बसों से भेजे जोशीमठ और माणा

Wed, 24 Jun 2020 02:30 AM IST
अलका त्यागी अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने सीमावर्ती इलाकों में निर्माण कार्यों को दी रफ्तार
  • रोडवेज की 11 बसों से पहुंचाए गए जोशीमठ और माणा गांव तक
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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भारत-चीन सीमा विवाद के बीच मजदूरों की कमी आड़े आई तो रातोंरात झारखंड से 230 मजदूर उत्तराखंड लाए गए। ट्रेन से रुड़की पहुंचने के बाद इन मजूदरों को सात दिन क्वारंटीन रखा गया। मंगलवार को रोडवेज की 11 बसों से इन मजदूरों को चीन सीमा से सटे जोशीमठ और माणा तक पहुंचा दिया गया।

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कोरोना लॉकडाउन की वजह से प्रदेशभर से मजदूर अपने घरों को पलायन कर गए थे। चीन सीमा पर बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की ओर से सड़क व अन्य निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। भारत-चीन के बीच सीमा विवाद बढ़ा तो बीआरओ ने भी निर्माण कार्यों में तेजी लाने की योजना बनाई।


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इसके तहत सबसे बड़ी किल्लत मजदूरों की सामने आई। इस किल्लत को दूर करने के लिए बीआरओ ने झारखंड से मजदूर बुलाए। कोरोना के डर में जी रहे मजदूरों के भीतर देशभक्ति का जज्बा जगाया गया। उन्हें चीन सीमा और उससे जुड़े निर्माण कार्यों की महत्ता समझाई गई तो सभी मजदूर तुरंत तैयार हो गए।

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11 बसें उपलब्ध कराई गई

बीआरओ एक सप्ताह पूर्व ट्रेन से इन 230 मजदूरों को रुड़की लाया। रुड़की से सभी मजदूरों को देहरादून के लालतप्पड़ में लाकर सात दिन के लिए इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन कर दिया गया। इसके बाद बीआरओ ने इन मजूदरों को सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचाने के लिए परिवहन निगम से बसों की मांग की। इस पर निगम ने 11 बसें उपलब्ध कराईं। मंगलवार को सभी मजदूर सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचा दिए गए।

देश के काम आने का जज्बा
जब मजदूरों को रोडवेज की बसों में बैठाया जा रहा था तो उनके भीतर देश के काम आने का जज्बा दिखाई दिया। मजदूरों का कहना था कि वैसे तो कोरोना के चलते वह अपने घर में सुरक्षित थे लेकिन देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर निर्माण कार्य इससे ज्यादा जरूरी है। इसलिए वे अपने बच्चों को छोड़कर यहां आ गए।

बीआरओ जिन 230 मजदूरों को निर्माण कार्यों के लिए झारखंड से लाया था, उन्हें निगम की बसों से चीन सीमा से सटे जोशीमठ, बद्रीनाथ से सटे माणा गांव तक पहुंचा दिया गया है। सभी मजदूर सकुशल पहुंच गए हैं। 
-रणवीर सिंह चौहान, प्रबंध निदेशक, परिवहन निगम
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