उत्तराखंड में एसएसबी प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की संख्या 20 हजार के करीब है। एसएसबी के गुरिल्ला वर्ष 2004 से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। अल्मोड़ा में वर्ष 2004 से लगातार आंदोलन चल रहा है। कम उम्र के गुरिल्लों को एसएसबी में समायोजित करने, अधिक उम्र के स्वयंसेवकों और मृतक गुरिल्लों के परिजनों के लिए पेंशन मांगी जा रही है।
वर्ष 2015 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरिल्लों का सत्यापन कराया था। उम्मीद थी कि गुरिल्लों को समायोजित कर कोई फैसला लिया जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। एसएसबी स्वयंसेवक संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष ब्रह्मानंद डालाकोटी का कहना है कि केंद्र सरकार गुरिल्लों का महत्व नहीं समझ रही है। यह कष्टदायी है। कहते हैं कि सीमांत क्षेत्र में फिर से युवाओं को गुरिल्ला प्रशिक्षण देना चाहिए।
एसएसबी के स्वयंसेवकों को नौकरी देने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से कहा है। सीमांत क्षेत्र में फिर से युवाओं को शस्त्र प्रशिक्षण देने का मामला गृह मंत्रालय के सामने उठाया जाएगा। गुरिल्लों की मांग को पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा।
- अजय टम्टा, सांसद, अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र।