सूत्रों के अनुसार, लिपुलेख सीमा पर फिलहाल शांति है। चीन की ओर से किसी तरह की हरकत नहीं की गई है, लेकिन जिस तरह से लद्दाख में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिक उकसावे की कार्रवाई कर रहे हैं, उसे देखते हुए यहां पर भी इस तरह के हालात से निपटने की पूरी तैयारी की गई है।
चीन अपना दबदबा बनाए रखने के लिए पीओके को बचाना चाहता है। इसलिए उकसावे के लिए इस तरह की कार्रवाई बार-बार कर रहा है। 14 जून के बाद से चीनी सैनिक सीमा पर इस तरह की हरकतें लगातार कर रहे हैं। वर्ष 1962 में चीन ने भारत को धोखा दिया था। तब हालात अलग थे, आज भारत की सेना हर परिस्थिति का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। यदि चीन कोई नापाक हरकत करता है तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
-रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल सत्यपाल सिंह गुलेरिया।
चीन दक्षिण एशिया में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए भारत के बढ़ते प्रभाव से चिंतित है और भारत पर चारों ओर दबाव डालना चाहता है लेकिन चीन को इस बात का आभास हो जाना चाहिए कि अब भारत 1962 का भारत नहीं रहा। भारत की सेनाएं चीन का हर जगह मुकाबला करने में सक्षम हैं। जब से कैलाश मानसरोवर क्षेत्र को मिसाइल क्षेत्र बनाने की सेटेलाइट से तस्वीरें आई हैं, हिंदू, बौद्ध, जैन आदि उनके पवित्र धार्मिक स्थल के युद्ध भूमि में बदले जाने से चिंतित हैं।
- बद्री दत्त कसनियाल, वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक मामलों के जानकार।