देखने में भले ही छोटे लगे पर कई बार इनकी ओर से दिए गए घाव बड़े हो जाते हैं। पिछले कई चुनावों की तरह इस बार भी निर्दलीय मैदान में हैं।
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इनमें कोई हैवीवेट नहीं है और पिछले चुनाव की तरह खासी संख्या भी इस बार मैदान में नही है। इतना जरूर है कि इनकी जगह छोटे दल और आप पार्टी की सशक्त भूमिका ने प्रदेश के बड़े दलों के लिए परेशानी जरूर खड़ी कर दी है।
हरिद्वार में सबसे अधिक निर्दल प्रत्याशी
2009 चुनाव के मुकाबले इस बार हरिद्वार में निर्दल प्रत्याशियों की संख्या अधिक है। 2009 में इस सीट पर कुल 12 निर्दलीय प्रत्याशी थे पर इस बार इनकी संख्या बढ़ कर 13 हो गई है। फिर आप पार्टी की प्रत्याशी ने भी इस बार हरिद्वार में डेरा डाल रखा है।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत की पत्नि रेणुका रावत और भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के मैदान में होने के कारण यह सीट पहले से ही हॉट बनी हुई है।
अन्य सीटों पर कुछ आसानी
दूसरी ओर बाकी सीटों पर इस बार निर्दलियों की संख्या कम होने से कांग्रेस-भाजपा के लिए थोड़ी आसानी हो सकती है। 2009 के चुनाव में कुल 32 निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में थे पर इस बार कुल 26 ही निर्दलीय मैदान में हैं।
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2009 में निर्दलीय करीब 14 प्रतिशत वोट ले गए थे। जाहिर है कि वोटों का एक हिस्सा इस बार भी इनके हाथ में रहेगा।