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स्वतंत्रता दिवस: देहरादून में 100 साल बाद भी मौजूद है आजादी के संघर्ष का गवाह

Wed, 15 Aug 2018 09:53 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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कुछ ऐसी है पानी की टंकी की हालत
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देहरादून जिले के थानो गांव में स्थित सौ साल पुरानी पानी की टंकी अजादी के संघर्ष की गवाह है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' आंदोलन से प्रभावित होकर इसी टंकी के पास सैकड़ों लोग अनशन पर बैठ गए थे। इन लोगों का अनशन तुड़वाने के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने लाठियां भी बरसाई। 

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आज 100 साल बार यह टंकी खस्ताहाल है। लेकिन आज भी यह टंकी स्वतंत्रता संग्राम की कहानी बयां करती है।

यह टंकी थानो ग्राम पंचायत कंडोगल स्थित कन्या कर्मोत्तर विद्यालय परिसर में स्थित है।1942 में जब देश भर में  'अंग्रेजों भारत छोड़ो' आंदोलन जोरों पर था। थानो के युवा भी इस आंदोलन में कूद पड़े थे।

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आंदोलनकारियों पर किया लाठीचार्ज और जेल भेजा

मोहनदास करमचंद गांधी - फोटो : BBC
देहरादून जिले के कई गांवों के लोगों ने इस पानी की टंकी के पास एकत्र होकर आंदोलन की रणनीति बनाई। 1945 के दौरान क्षेत्र के युवा पद्म सिंह सोलंकी, वैद्य सेनपाल सिंह भिडोला, गौरीश वर्मा, बुद्धदेव, शेरा के पंचम सिंह कृषाली, बमेत के पद्म सिंह रावत, बड़ासी के हरि सिंह गोदी, भूरिया सिंह व विशन सिंह और घंडोल के सूरत सिंह चौहान के साथ सैकड़ों आंदोलनकारी यहीं अनशन पर बैठ गए।

जिसके बाद अंग्रेजों ने इन लोगों पर लाठीचार्ज किया और जेल में बंद कर दिया। देशभर के अनगिनत आजादी के दीवानों की तरह थानो के स्वतंत्रता सेनानी भी गुमनामी के अंधेरे में डूब गए। 

स्थानीय लोगों की मांग है कि इस पानी की टंकी को स्मारक के रूप में विकसित किया जाए। ताकि, आने वाली पीढ़ियां अपने पूर्वजों के इस बलिदान और संघर्ष को याद रख सकें। 
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