मुकेश नारायण शर्मा ने कहा कि पिता के भतीजे प्रेम नारायण शर्मा, वीरेंद्र नारायण शर्मा व सतेश्वर नारायण शर्मा भी परिवार से प्रेरित होकर 18 से 21 साल की उम्र में ही आंदोलन में कूद पड़े थे।
सतेश्वर नारायण शर्मा एसजीआरआर नेहरुग्राम में प्रिंसिपल भी रहे। उनका निधन 2017 में हुआ। मुकेश नारायण शर्मा वर्तमान में उत्तराखंड स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं उत्तराधिकारी कल्याण समिति के संगठन मंत्री हैं।
स्व. शांति नारायण शर्मा की पत्नी 90 वर्षीय प्रेमलता शर्मा खुद को बेहद गौरवशाली बताती हैं। उनका कहना है कि जिस परिवार ने आजादी की लड़ाई में योगदान दिया हो, इससे बड़ा सौभाग्य नहीं हो सकता। प्रेमलता ने पुराने किस्से याद करते हुए कहा कि उनके पति स्वतंत्रता दिवस के दिन बेहद गर्व महसूस करते थे। वो कहा करते थे कि हमारा संघर्ष और त्याग देश को आजादी दिलाने में काम आया।
वीरांगनाओं का ध्यान रखे सरकार
मुकेश नारायण शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया। उनके परिवारों ने भी कष्ट सहकर अपना योगदान दिया। कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की वीरांगनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। अच्छा होता कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शासन उनकी मां को सम्मान देता।