नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जिंदगी के कई अहम घटनाक्रमों का साक्षी दून भी रहा है। राज्य अभिलेखागार में मौजूद नेता जी से जुड़े कई दस्तावेज उनके जीवन के कई पहलुओं को रेखांकित करते हैं। अभिलेखागार में आजाद हिंद फौज (आईएनए) में शामिल रहे उत्तराखंड के वीरों की भी जानकारियां मौजूद हैं।
शनिवार 23 जनवरी को नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर हम दून में मौजूद नेता जी की निशानियां पाठकों से साझा कर रहे हैं। इनमें से कई ऐसे दस्तावेज और फोटो हैं, जिनके संबंध में आम लोगों को अधिक जानकारी नहीं है।
मौत से जुड़े विवाद से भी नाता
दून से नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत के विवाद का भी नाता है। नेताजी की मौत की जांच के लिए गठित जस्टिस मुखर्जी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में देहरादून के स्वामी शरदानंद का जिक्र किया था। हालांकि उन्हीं के कुछ शिष्यों का मानना है कि स्वामी जी सुभाष चंद्र बोस नहीं थे।
दून में मौजूद है आईसीएस से इस्तीफे का पत्र
राज्य अभिलेखागार के निदेशक डॉ. लालता प्रसाद का कहना है कि अभिलेखागार में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन व आजाद हिंद फौज से संबंधित कई दुर्लभ अभिलेख मौजूद हैं। इनमें वह पत्र भी शामिल है जिसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया को आईसीएस से इस्तीफे के लिए भेजा था।
इसमें नेताजी ने लिखा है कि वह अपना नाम प्रशिक्षु की सूची से हटवाना चाहते हैं। अंग्रेजी में लिखे इस पत्र में नेता जी ने लिखा है कि वह अगस्त 1920 में हुई खुली प्रतियोगिता में चुने गए थे। अब तक उन्हें सौ पाउंड मिल चुके हैं। जैसे ही उनका इस्तीफा स्वीकार होगा वह सारी रकम लौटा देंगे। यह पत्र 24 नवंबर 1921 को लिखा गया था।
आईएनए के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ है दुर्लभ चित्र
अभिलेखागार में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आईएनए के वरिष्ठ अधिकारी एसी चटर्जी, एमजेड कियानी व हबीबुर्रहमान के साथ का दुर्लभ फोटो भी है। यह तस्वीर नवंबर 1939 में ली गई थी।
वहीं पांच नवंबर 1940 को ली गई एक तस्वीर भी अभिलेखागार में मौजूद है। नेता जी की यह तस्वीर एक सप्ताह के भूख हड़ताल के पश्चात जेल से रिहा होने के बाद उनके शयन कक्ष में विश्राम करते हुए खीचीं गई थी।
हिंद फौज में शामिल थे उत्तराखंड के 59 वीर
अभिलेखागार में आजाद हिंद फौज में शामिल रहे उत्तराखंड के 59 सैनिकों के भी रिकार्ड हैं। निदेशक डॉ. लालता प्रसाद ने बताया कि आजाद हिंद फौज में शामिल रहे कैप्टन आरएल अवस्थी (97 वर्ष) अब भी जीवित हैं। धनपुर के धर्मानंद काला, ढाईज्यूली के सोड़िया सिंह चौहान, थापली के दीवान सिंह नेगी, विडालस्यू के दयाल सिंह नेगी, पिनानी पट्टी से कुंदन सिंह गुर्साइं, ग्राम कदूला निवासी सुल्तान सिंह रावत समेत कुल 59 साहसी सैनिक आइएनए में शामिल रहे। इन्होंने देश की आजादी के लिए जिंदगी दांव पर लगाकर आजाद हिंद फौज के लिए काम किया।
नेताजी के जीवन पर एक नजर
23 जनवरी 1897 को सुभाष चंद्र बोस का जन्म वर्तमान में उड़ीसा के कटक में हुआ।
21 अक्तूबर 1943 को सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार बनाई।
1944 को आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों पर दोबारा आक्रमण किया और कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त करा लिया।
6 जुलाई 1944 को नेताजी ने रंगून रेडियो स्टेशन से महात्मा गांधी के नाम एक प्रसारण जारी किया, जिसमें उन्होंने इस निर्णायक युद्ध में विजय के लिए उनका आशीर्वाद और शुभकामनाएं मांगीं।