अवैध खनन करने वालों पर उत्तराखंड में किस तरह मेहरबानी दिखाई जा रही है इसकी बानगी देखिए।
तीन पट्टाधारकों पर अवैध खनन करने पर दो करोड़ 90 लाख रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया था, लेकिन इसमें से दो करोड़ 63 लाख रुपए से ज्यादा की रकम माफ कर दी गई। सिर्फ 26 लाख 78 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया। सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत यह जानकारी सामने आई है।
देहरादून निवासी प्रमोद डोभाल को सूचना के अधिकार में मिली जानकारी प्रदेश में खनन को लेकर हो रहे खेल को उजागर कर रही है। जानकारी के मुताबिक, अवैध खनन करने पर पट्टाधारक अरुण कुमार शर्मा पर 1.79 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया था।
इसी तरह पट्टाधारक बामो देवी पर 76.85 लाख रुपए और पट्टाधारक सुशील कुमार पर 34.18 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था। इन तीनों पट्टाधारकों ने शासन में अपील की तो अपीलीय अधिकारी का दिल इतना पसीजा की जुर्माने की राशि को कई गुना तक कम कर दिया गया।
अरुण कुमार शर्मा पर मात्र दस लाख का जुर्माना लगाया गया। बामो देवी पर भी दस लाख का जुर्माना लगाया गया और सुशील कुमार पर लगाया गया जुर्माना मात्र 6.78 लाख कर दिया गया। खनन इकाई के संयुक्त निदेशक एसएल पैट्रिक का जवाब है कि नियमावली में इस बात का जिक्र नहीं है कि जुर्माने की राशि कितनी कम की जा सकती है। यह राज्य सरकार के ऊपर निर्भर करता है कि खनन की राशि को कितना कम किया जा सकता है।
जो वाहन है ही नहीं, उससे कैसे ढोई खनन सामग्री
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मिले रवन्ने भी घालमेल की ओर इशारा कर रहे हैं। रवन्ने में एक वाहन यूके 8 सीए-8267 से खनन सामग्री ले जाना दिखाया गया है।
वहीं, सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत परिवहन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इस नंबर का कोई वाहन ही नहीं है। यूके 8 पी-9832, यूके 8 पी-4831 नंबर खेती के उपयोग में आने वाले ट्रैक्टरों के हैं, लेकिन इन पर खनन सामग्री ढोना दिखाया गया है।