अब उत्तराखंड में भूकंप आने से पहले आईआईटी रुड़की अलर्ट कर देगी। उत्तरकाशी और चमोली में आने वाले भूकंप की 30 सेकेंड पहले ही लोगों को चेतावनी जारी हो सकेगी।
आईआईटी रुड़की में चल रहे अर्ली वॉर्निंग प्रोजेक्ट से यह संभव होने जा रहा है। प्रोजेक्ट हेड और आईआईटी के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. अशोक कुमार की मानें तो जनवरी से भूकंप अलर्ट के लिए परिसर में पूरी व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाएगी। इसके बाद इसे देश भर में लागू करने के लिए केंद्र की नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी को पत्र लिखा जाएगा, ताकि आमजन को भी इसका लाभ मिल सके।
मिनिस्ट्री आफ अर्थ साइंस की ओर से अर्ली वॉर्निंग प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी आईआईटी रुड़की को दी गई है, जिस पर करीब दो साल से काम चल रहा है। इसके तहत उत्तराखंड के उत्तरकाशी से जोशीमठ तक 75 सेंसर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा अगले 10-15 दिनों में 15 और इंस्ट्रुमेंट लगाए जाएंगे। इसके लिए बीएसएनएल के 50 टावरों की मदद ली गई है।
बैठक में दिया गया डिमोस्ट्रेशन
बीएसएनएल के वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क ब्राडबैंड कामर्शियल सेवा के जरिए यह संभव हो सका है। अब स्थिति यह है कि लगाए गए सेंसर में जापान और ताइवान में आए छह मैग्नीट्यूट से अधिक भूकंप का डाटा डालकर इसका परीक्षण भी किया जा चुका है, जो कि सफल रहा है।
ऐसे में अब इसे आईआईटी परिसर में इंप्लीमेंट करने की कसरत की जा रही है। अर्थक्वेक डिपार्टमेंट के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. अशोक कुमार के अनुसार 25 अगस्त को आईआईटी में हुई महत्वपूर्ण बैठक में इसका डिमोस्ट्रेशन दिया गया है। अब जनवरी तक इसे आईआईटी परिसर में फुल फ्लैश इंप्लीमेंट करने की योजना है।
इसके तहत छह मैग्रीट्यूट से अधिक के भूकंप पर ही चेतावनी जारी हो सकेगी, जिसमें जानमाल के नुकसान का बहुत अधिक खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले आईआईटी रुड़की के परिसर में इसे इंप्लीमेंट किया जाएगा। इसके बाद इसे देश भर में लागू करने की जिम्मेदारी केंद्र की नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी की होगी।
गुजरात में भी चल रहा प्रोजेक्ट, आज आएगी टीम
आईआईटी रुड़की के अलावा गुजरात के आईएसआर गांधीनगर में भी अर्ली वार्निंग प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसके तहत वहां की टीम बुधवार को आईआईटी रुड़की में आएगी और यहां चल रहे कार्य के बारे में पूरी जानकारी लेगी।
कुमाऊं तक किया जाएगा विस्तार
आईआईटी के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. अशोक कुमार का कहना है कि फिलहाल गढ़वाल के उत्तरकाशी और जोशीमठ में सेंसर स्थापित किए गए हैं।
इसे अगले एक साल में कुमाऊं के धारचूला तक करने की योजना है, जिसमें करीब 100 सेंसर और स्थापित करने होंगे। इसके लिए प्रोजेक्ट को एक साल बढ़ाने की अनुमति मांगी गई है। मालूम हो कि जून-2016 तक के लिए यह प्रोजेक्ट मंजूर है।
इन माध्यमों से किया जा सकता है अलर्ट
- सायरन के जरिए इंटरनेट से कनेक्ट करके।
- मोबाइल फोन मैसेज, ट्यून या फिर वायस के जरिए।
- टीवी चैनलों पर मैसेज फ्लैश करके।
प्रोजेक्ट पर स्टेट और केंद्र की भी नजर
आईआईटी के इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर राज्य और केंद्र सरकार भी लगातार नजर बनी हुई है। आईआईटी वैज्ञानिक के अनुसार जुलाई माह में उत्तराखंड के गर्वनर ने इस संबंध में मीटिंग बुलाई थी, जिसमें आईआईटी के वैज्ञानिकों के अलावा मुख्य सचिव सहित शासन के तमाम आला अधिकारी मौजूद थे। वहीं केंद्र की नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी की ओर से भी प्रोजेक्ट की प्रोगेस रिपोर्ट लगातार ली जा रही है।