अरुणाचल प्रदेश में वायु सेना के पवन हंस हेलीकॉप्टर के क्रैश होने के आठ दिन बाद बुधवार सुबह हेलीकॉप्टर में सवार आईएएस कमलेश जोशी समेत दोनों पायलटों के शव हेलीकॉप्टर के मलबे के पास से ही बरामद हो गए।
हादसे की सूचना के बाद से ही कमलेश जोशी के बागेश्वर स्थित पैतृक गांव करास में सन्नाटा पसरा हुआ है। कमलेश जोशी इस इलाके के एक मात्र आईएएस अधिकारी थे। बागेश्वर-अल्मोड़ा मुख्य मोटर मार्ग से पालड़ीछीना को जाने वाले लिंक मार्ग के साथ करास गांव भी जुड़ा है।
आईएएस कमलेश जोशी का मूल निवास यहीं है। उनकी बिरादरी के ताऊ केशव दत्त जोशी ने बताया कि कमलेश के पिता ख्याली दत्त जोशी बंगाल इंजीनियरिंग में सूबेदार थे और नौकरी के साथ ही दिल्ली में बस गए थे। बड़े पुत्र कमलेश ने पहले कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की।
इसके बाद नौकरी करते हुए आईएएस की परीक्षा भी पास कर ली। वर्तमान में वह अरुणाचल प्रदेश के तीरप जिले के जिलाधिकारी के पद पर तैनात हैं। 35 वर्षीय कमलेश का विवाह कुछ साल पहले ही हुआ था। अभी बच्चे नहीं हैं। कमलेश के छोटे भाई राजेश जोशी सेना में मेजर हैं।
उनके चाचा जय किशन जोशी पूसा इंस्टीट्यूट में और छोटे चाचा लीलाधर जोशी दिल्ली विकास प्राधिकरण में कार्यरत हैं। पूरा परिवार दिल्ली में ही रहता है। श्री जोशी ने बताया कि हादसे की सूचना टीवी चैनलों के माध्यम से मिल गई थी।
करास निवासी अवकाश प्राप्त शिक्षक भुवन चंद्र जोशी ने बताया कि कमलेश जोशी और परिवार के अन्य लोग कभी-कभार यहां पूजा-पाठ आदि के लिए आते थे। कमलेश हाल के कई सालों से नहीं आए। इस हादसे के बाद सभी दुखी हैं।
पड़ोसी गांव कराला पालड़ी निवासी दीप करायत ने बताया कि कमलेश जोशी इस इलाके से अकेले आईएएस अधिकारी हैं। इधर, सूत्रों के मुताबिक अरुणाचल में जिस जगह हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ था।
वहीं बुधवार सुबह सेना के ऑपरेशन के बाद मलबे के पास से ही आईएएस कमलेश जोशी और दोनों पायलटों कैप्टन एमएस बराड़ तथा कैप्टन राजीव होसकोटे के क्षत-विक्षत शव बरामद हुए हैं।
बता दें कि हेलीकॉप्टर ने बीती चार अगस्त को तीरप जिले के मुख्यालय खोनसा से लांगडींग के लिए उड़ा था। उड़ान भरने के पांच मिनट बाद ही इस हेलीकॉप्टर का चाबुआ स्थित एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क कट गया था।