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मैं इंटरनेशनल खिलाड़ी हूं, निराश नहीं होताः चैंपियन

Thu, 17 Oct 2013 06:35 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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खानपुर विधायक प्रणव सिंह को पद से हटाने पर भले ही कांग्रेस सख्त होने का दावा करे पर हकीकत यह है कि पार्टी में अनुशासन का मसला जस का तस है।
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अनुशासन समिति की ओर से खनपुर विधायक को भेजे गए नोटिस का जवाब पार्टी को बुधवार तक भी नहीं मिला था। इसके बावजूद कांग्रेस की अनुशासन समिति इस चैप्टर को बंद हुआ मान रही है। साफ है कि इस नोटिस का भी हश्र वही हुआ जो समिति की ओर से जारी पहले के नोटिसों का हुआ।

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शिकायत मिली ही नहीं
प्रणव के मामले में कांग्रेस संगठन शुरू से ही दावा करता रहा कि एक्शन लिया जाएगा। पर यही कांग्रेस मंत्री के भोज में गोली चलाने के मामले में पूरी तरह से खामोश रहा।
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विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के मुखर होने के बाद सरकार हरकत में आई पर संगठन केस्तर पर कोई बात ही नही हुई। यहां तक की अनुशासन समिति यह कहकर किनारे हो गई कि शिकायत मिली ही नहीं।

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शिकायत की जरूरत महसूस नही हुई
दूसरी ओर अनुशासन समिति को प्रणव की बयानबाजी पर किसी शिकायत की जरूरत महसूस नही हुई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य ने सख्त रुख अपनाया तो समिति ने लगे हाथों नोटिस जारी किया।

पर प्रणव पहले यह कहकर बच निकलने की कोशिश करते रहे कि नोटिस मिला ही नहीं। बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि नोटिस उन्हें मिल गया है पर उसका जवाब विधायक ने दिया ही नहीं।

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अनुशासन के मसले का सबसे छोटा रोल
जाहिर है कि प्रणव को पद से हटाने में अनुशासन के मसले का सबसे छोटा रोल रहा। खुद अनुशासन समिति के अध्यक्ष नरेंद्र भंडारी इसे स्वीकार कर रहे हैं। भंडारी के मुताबिक सरकार ने फैसला ले लिया है। मामला पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के बीच था। अनुशासन समिति केलिए अब कुछ करने को नहीं रह गया है।

अन्य कई मामलों में अनुशासन समिति की ओर से भेजे गए नोटिसों का हाल भी यही रहा। इससे पहले बागियों और दागियों के खिलाफ समिति ने करीब सौ नोटिस जारी किए थे। बाद में इनमें रोल बैक कर लिया गया।

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इनकी भी रही भूमिका

- प्रणव सिंह की वन विकास निगम के अध्यक्ष पद से विदाई में प्रणव की अपनी आदत का भी हाथ रहा। प्रणव पहले हरिद्वार सांसद और केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत के निकट थे। प्रणव ने बाद में रावत के खिलाफ ही मोरचा खोल लिया। फिर प्रणव मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की गुड बुक्स में दिखाई दिए पर हालिया प्रकरण मे प्रणव ने मुख्यमंत्री को ही निशाने पर ले लिया था। लिहाजा प्रणव को इस कैंप का भी कोप भाजन बनना पड़ा।

- कृषि मंत्री हरक सिंह के भोज में गोली चलाने के मामले में दिल्ली के कांग्रेसी नेता भी प्रणव से नाराज थे। लिहाजा अध्यक्ष पद से हटाने में हाईकमान की भी भूमिका रही।
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पढें, मोदी को प्रधानमंत्री बनाकर ही लौटूंगा हरिद्वारः रामदेव- पीडीएफ का लगातार मुख्यमंत्री पर दबाव था। इस मामले में सरकार के सहयोगी मंत्री प्रणव से खासे नाराज थे। बातचीत के जरिए हल निकालने की हर कोशिश को सुरेंद्र राकेश खुद ही फेल करते रहे।- कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य भी इस बार प्रणव के खिलाफ थे। रुड़की विधायक प्रदीप बतरा से कोठी खाली कराने के प्रकरण में आर्य को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा था। ऐसे में अनुशासन समिति के जरिए नोटिस भिजवाने के बाद आर्य भी प्रणव सिंह के खिलाफ कार्यवाही पर आमादा थे।
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