पहले देखा जाएगा...प्रोजेक्ट के इर्द-गिर्द कितने ग्लेशियर की झीलें
ये देखा जाएगा कि उस प्रोजेक्ट के इर्द-गिर्द कितने ग्लेशियर की झीलें हैं। अगर वह फटती हैं तो उनसे निकलने वाला पानी किस तरह से उस पावर प्रोजेक्ट के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है। ताकि उस प्रोजेक्ट को नुकसान न हो और प्रवाह भी बना रहे।
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हर प्रोजेक्ट का सीसमिक डिजाइन बनेगा
पावर प्रोजेक्ट का सीसमिक डिजाइन भी बनाया जा रहा है। आईआईटी रुड़की की मदद से ये काम किया जा रहा है। इसी प्रकार जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की मदद से लैंडस्लाइड जोनेशन मैप भी बनाया जा रहा है। ताकि यह स्पष्ट रहे कि उस जल विद्युत परियोजना के आसपास कितनी जगह भू-स्खलन का खतरा हो सकता है। हर प्रोजेक्ट का डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान, अर्ली वार्निंग सिस्टम, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी अनिवार्य किया गया है।