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यहां 4-5 लाख में लगती है मासूमों की बोली

Fri, 07 Mar 2014 01:47 PM IST
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
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राजधानी देहरादून में कमीशनखोरी के लिए बच्चों को बेचा जा रहा है। खरीद-फरोख्त करने वाले गैंग ने पूरा नेटवर्क बिछा रखा है।
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धंधे में कई सफेदपोश भी शामिल
इसके खरीदार हर वर्ग और परिवार हैं। हैसियत के मुताबिक बच्चों की बोली लगाई जाती है। सूत्रों की मानें तो एक मासूम की कीमत चार से पांच लाख रुपए तक लगती है। इस धंधे में कई सफेदपोश भी शामिल हैं।

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इस बात की तसदीक गुरुवार को हुई घटना में डॉक्टर की संलिप्तता सामने आने के बाद हो गई है। एसटीएफ के ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल के अनुसार, इस धंधे में जबर्दस्त कमीशनखोरी है।
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यह बात अलग है कि जिसका बच्चा है, उसे बेहद कम रुपये मिलते हैं। ज्यादातर पैसा बिचौलिए हजम कर जाते हैं। परिजनों को सिर्फ पचास हजार या लाख रुपए मिलते हैं।
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बीते महीने भी दून महिला अस्पताल से एक पिता ने अपना बच्चा बेच दिया था। बाद में उसे बरामद कर लिया गया। मगर पुलिस गैंग की तह तक नहीं पहुंच सकी।

गैंग की मुखबिरी भी मजबूत
बच्चों की खरीद-फरोख्त में लगे गैंग की मुखबिरी भी इतनी मजबूत है कि वह बच्चा बेचने और खरीदने के इच्छुक लोगों की पूरी जानकारी रखते हैं।

इसमें उनकी मदद मोहल्ले में काम करने वाले धोबी, पान की दुकान वाले और सब्जी वाले तक करते हैं।

कोख में भी बिकते हैं बच्चे
सूत्रों की मानें तो बच्चों को बेचने का धंधा कोख से ही शुरू हो जाता है। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर आदि क्षेत्रों के कई बेऔलाद व्यापारी गुरबत के मारों को पैसे का लालच दे कोख खरीद लेते हैं।

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बच्चे के होने का सारा खर्च वही उठाते हैं और बाद में पैसा दे बच्चा ले चलते बनते हैं।

मानव तस्करी के तहत केस दर्ज किया जा रहा है। खरीद-फरोख्त में शामिल लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। सभी को गिरफ्तार किया जाएगा।
- नवनीत सिंह, एसपी सिटी
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