राज्य के लाखों गरीबों को एक अदद आशियाने की तलाश है, वहीं शहरी विकास विभाग के अफसरों की लापरवाही के चलते 364 भवनों का निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद मकानों का आवंटन नहीं किया जा रहा है। विभागीय अफसर पिछले आठ साल से गरीबों की आशियाने की फाइल दबाए बैठे हैं।
अब यह प्रकरण मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है। संसदीय सचिव ने अफसरों की इस लापरवाही से मुख्यमंत्री को अवगत कराया है। मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण में कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
शहरी विकास विभाग की ओर से गरीबों को आशियाना मुहैया कराने के उद्देश्य से देहरादून की काठबंगला कालोनी में 148, ब्रहमपुरी में 56, रामनगर में 64 और हरिद्वार में 64 मकान बनाने की मंजूरी दी गई। निर्माण का जिम्मा यूपी निर्माण निगम और पीडब्ल्यूडी को सौंपा गया। यूपी निर्माण निगम को देहरादून और पीडब्ल्यूडी को हरिद्वार के सभी मकानों को बनाने को कहा गया है।
दोनों निर्माण एजेंसियों को 35 करोड़ का बजट भी आवंटित कर दिया। पीडब्ल्यूडी ने हरिद्वार में सभी मकानों का निर्माण पूरा कर लिया। जबकि यूपी निर्माण निगम ने भी काफी हद तक निर्माण पूरा कर लिया। कुछ मकानों का निर्माण पूरा होना है। चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माण पूरा होने के बावजूद शहरी विकास विभाग की ओर से अभी तक मकानों का आवंटन गरीबों को नहीं हो पाया है।
सीएम तक पहुंची बात, अफसरों से मांगा जवाब
शहरी आवास विकास की संसदीय समिति ने इस पर गहरी आपत्ति जताते हुए पूरे प्रकरण से मुख्यमंत्री को अवगत कराया है। मुख्यमंत्री ने शहरी विकास विभाग के अफसरों से इस संबंध में जानकारी मांगी है। मकानों के आवंटन में देरी क्यों हो रही है, यदि इसकी गंभीरता से जांच करा ली जाए तो कई अफसरों, कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है।
दूसरी ओर संसदीय सचिव शहरी विकास राजकुमार का कहना है कि शहरी विकास और नगर निगम के अफसरों के साथ कई बार निरीक्षण किया गया। मकानों के आवंटन की भी बात कही गई, लेकिन अभी तक आवंटन नहीं हो पाया है, जो गंभीर बात है। वहीं जिन मकानों का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो पाया हैं, उन्हें पूरा कराने के निर्देश यूपी निर्माण निगम को दिए गए हैं।
Published by: Vivek Singh