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अवैध कब्जे पर निगम का ऑपरेशन ‘दबाव’

Mon, 24 Nov 2014 03:18 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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दून के पैसिफिक हिल्स अपार्टमेंट में नगर निगम ने फ्लैट्स के बीचों बीच भी दीवार बनाने का कार्य शुरू कर दिया।
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निगम मांग रहा सात फ्लैट
इससे अपार्टमेंट के एक हिस्से का काम प्रभावित होना तय है। सूत्रों का कहना है कि निगम ऐसा एक रणनीति के तहत कर रहा है, ताकि पैसिफिक हिल्स प्रबंधन निगम की बात मान ले और उसे सात फ्लैट दे दे।

नगर निगम ने अपनी डेढ़ बीघा जमीन के साथ ही 100 वर्ग मीटर के उस भूखंड को भी हासिल करने के लिए दीवार बनवा रहा है, जिस पर सात मंजिला अपार्टमेंट का कुछ हिस्सा बनाया गया है।
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मुख्य नगर अधिकारी हरक सिंह रावत पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि निगम की जमीन पर बने सात फ्लैटों को निगम को हैंडओवर नहीं किया गया तो उसे ढहा दिया जाएगा।

हालांकि, ऐसा करने का मतलब होगा पूरे अपार्टमेंट का ढह जाना, क्योंकि यदि एक तरफ का पिलर टूटेगा तो पूरी बिल्डिंग की नींव हिल जाएगी। यह बात निगम को भी मालूम है। यही वजह है कि एमएनए बार-बार सात फ्लैटों को तोड़ने की बात कह रहे हैं।

हाईकोर्ट के लिए गई टीम
नगर निगम के अधिकारियों की एक टीम हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए नैनीताल चली गई है। सोमवार को अदालत में निगम की तरफ से अपनी बात रखने के लिए अर्जी दी जाएगी।

मेयर विनोद चमोली ने बताया कि हाईकोर्ट के समक्ष यह तथ्य रखा जाएगा कि पिछले साल जो पैमाइश जिला प्रशासन ने की थी, उसकी इस बार भी पैमाइश की गई।

जिला प्रशासन ने बिल्डर को क्लीन चिट दी थी, लेकिन अब जहां अपार्टमेंट बना है वहां निगम की जमीन पर कब्जा साबित हो गया है। यह बात अदालत को बताई जाएगी, ताकि वहां से निगम को न्याय मिल सके।

कब्जा साबित हुआ तो फंसेगा प्रशासन
नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यदि नगर निगम की भूमि पर कब्जे की बात साबित हुई तो जिला प्रशासन के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। क्योंकि पिछले साल हाईकोर्ट के आदेश पर हुई पैमाइश में प्रशासन ने बिल्डर को क्लीन चिट दी थी।

मेयर विनोद चमोली ने भी प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हरीश रावत और शहरी विकास सचिव को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि एक साल पूर्व हुई पैमाइश में नगर निगम के कर्मचारी मौजूद तो थे।

लेकिन जांच रिपोर्ट पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। मेयर ने कहा कि इस मामले में जिला प्रशासन के साथ नगर निगम की भी छवि खराब हो रही है।

कब्जे नहीं हटे तो बड़ी तबाही तय
मसूरी के निचले क्षेत्र से निकलने वाला नाला अब नाली में तब्दील हो गया है। हर बरसात में यह नाला उफान पर होता, लेकिन उसकी एक ‘हद’ होती है। इसी हद पर विश्वास करते हुए भूमाफियाओं ने नाले के दोनों ओर कब्जा कर लिया है।

डर इस बात का है कि यदि पहाड़ पर अतिवृष्टि हुई तो अतिक्रमण के कारण बड़े इलाके में तबाही हो सकती है। मेयर विनोद चमोली ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को पत्र भेजकर इस भयावह स्थिति से अवगत कराया है। रिस्पना और बिंदाल नदी के अलावा शहर के बीचोंबीच कई छोटे-बड़े नाले गुजरते हैं।

अतिक्रमण के कारण इन नालों का अस्तित्व खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है। इसका असर बरसात में कई इलाकों में बड़े नुकसान के रूप में देखने को मिलता है। लेकिन मसूरी से निकलने वाले नालों में सैलाब आया तो स्थिति भयानक हो सकती है।

मेयर ने लिखा है कि शहर के बाहरी क्षेत्रों में स्कूल-कालेजों के अलावा कई बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट बन रहे हैं। इन योजनाओं में नगर निगम, वन विभाग, नान जेड ए श्रेणी और राजस्व विभाग की जमीनों पर कब्जाया किया गया है।
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सीएम को भेजे पत्र में मेयर ने इन सभी भवनों की जांच की मांग की है। मेयर का कहना है कि इन सभी की जांच करके नाले को कब्जों से मुक्त कराया जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो हमें बड़े विनाश के लिए तैयार रहना चाहिए।
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