सालों बाद देहरादून नगर निगम ने हाउस टैक्स पर कवायद पूरी की, लेकिन अब इसे लागू करने में शासन स्तर से ब्रेक लग गया है।
फंस रहा तकनीकी पेंच
महीनों बाद भी तय नहीं हो सका है कि शहर में टैक्स कब लगेगा। इससे जहां लोगों को संपत्ति के बंटवारे में दिक्कत हो रही है वहीं दाखिल खारिज में भी तकनीकी पेंच फंस रहा है।
कांग्रेस और भाजपा पार्षद बोर्ड बैठक में यह तय नहीं कर सके थे कि टैक्स का सर्वे सेल्फ असेसमेंट के आधार पर हो या रेंटल वैल्यू से। मेयर विनोद चमोली निगम एक्ट का हवाला देते हुए सेल्फ असेसमेंट से हाउस टैक्स लागू कराना चाहते थे।
लेकिन बोर्ड बैठक में इस पर सहमति नहीं बनी। कांग्रेसी पार्षदों ने इससे लोगों पर आर्थिक भार बढ़ने की आशंका जताई।
तर्क दिया गया कि रेंटल वैल्यू असेसमेंट से हाउस टैक्स निकाला जाए और उस पर कुछ प्रतिशत और जोड़कर लागू कर दिया जाए।
बात नहीं बनी तो फाइल शासन को भेजी गई। लेकिन वहां भी इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। मेयर विनोद चमोली का कहना है कि टैक्स लागू होने से निगम की आय बढ़ेगी। आम जनता को भी लाभ मिलेगा।
लेकिन शासन स्तर पर इसे लटकाया जा रहा है। बताया कि लगातार रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं।
तीन करोड़ का होगा फायदा
टैक्स लागू होने पर निगम को हर साल लगभग तीन करोड़ का राजस्व मिल सकता है। नए सर्वे में शहर में पचास हजार से ज्यादा घर जुड़े हैं, जबकि सात नए गांव भी निगम क्षेत्र में आए है।