वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने स्पीकर की तरफ से पैरवी की।
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कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के मामले में स्पीकर की ओर से हाईकोर्ट में शनिवार को पक्ष रखा गया। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पैरवी करने हाईकोर्ट पहुंचे पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि 18 मार्च को भाजपा ने कांग्रेस के नौ विधायकों की हॉर्स ट्रेडिंग की थी। इस मामले में याचिकाकर्ता बागी विधायकों की ओर से पक्ष सोमवार को रखा जाएगा।
न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल की तरफ से कपिल सिब्बल ने घंटेभर अपना पक्ष रखा।
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने इस मामले में ट्रांसफर अर्जी लगाकर हाईकोर्ट के निर्णय से बचना चाहा है। जबकि पूर्व में इस प्रकरण पर तिथि सुनवाई के लिए नियत है उसके बावजूद याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कोर्ट नहीं पहुंचे, इससे ही उनकी मंशा साफ दिखती है कि वह बचना चाहते हैं।
'विधायकों ने 18 मार्च को ही छोड़ दी थी पार्टी'
नैनीताल हाईकोर्ट
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स्पीकर की ओर से कहा गया कि इन बागी विधायकों ने अपने बयानों में कहा कि उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता का त्याग नहीं किया है। सिब्बल ने कहा कि 18 मार्च की सुबह ही याचियों ने कह दिया था कि वे सरकार के खिलाफ वोट देंगे। उन्होंने कहा कि बागी विधायक जब तभी पार्टी छोड़ चुके थे तो अब कोर्ट में कैसे कह सकते हैं कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी।
स्पीकर के पैरवीकार ने भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने राज्यपाल को सरकार के अल्पमत में होने की जानकारी 18 मार्च की सुबह दे दी गई थी, जिससे साफ नजर आता है कि उन्होंने नौ विधायकों को सुबह ही हॉर्स ट्रेडिंग के माध्यम से खरीद लिया था।
कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि 18 मार्च को राज्यपाल से मिलकर ये कहा गया कि 26 भाजपा विधायक और उनके 9 विधायक हैं जिसकी वजह से सदन मे मौजूद 68 विधायकों में से 35 के हटने के बाद सरकार गिर गई है। जबकि अपने बयानों में बर्खास्त विधायकों ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता नहीं छोड़ी है। स्पीकर ने कोर्ट को बताया कि मीडिया में उनके बारे में भी दिखाया गया था कि किस तरह वे भाजपा के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ गए।
कोर्ट में विनियोग विधेयक को बताया पारित
स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल
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स्पीकर की ओर से कहा गया कि उत्तराखंड विधानसभा में 18 मार्च को विनियोग विधेयक संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप पारित हुआ। दलबदल कानून के तहत सुनवाई का पर्याप्त अवसर देने के बाद बागी विधायकों पर कार्रवाई की गई।
दूसरी तरफ याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता की ओर से इस मामले पर सुनवाई के लिए तिथि को आगे बढ़ाए जाने की मांग करते हुए कहा कि उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस प्रकरण के ट्रांसफर के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया है। जिस पर स्पीकर की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि इस मामले में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
इसलिए मामले की सुनवाई आज ही की जाए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से तिथि बढ़ाने के तथ्य को नकारते हुए सुनवाई जारी रखने के निर्देश दिए। बता दें कि नौ बागी विधायकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 27 मार्च को विधानसभा अध्यक्ष की ओर से सदस्यता को समाप्त करने के आदेश को चुनौती दी थी।