हेमवती नंदन बहुगुणा मेडिकल यूनिवर्सिटी आगामी सत्र से डिजिटल एआई का नया स्वास्थ्य पाठ्यक्रम शुरू करेगा। इसमें वर्तमान कार्यरत चिकित्सकों को स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल एआई तकनीक के उपयोग के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी आने का अनुमान है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. भानु दुग्गल ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में यह जानकारी दी।
प्रो. दुग्गल ने कहा कि उत्तराखंड में चिकित्सा शिक्षा लगातार सुधर रही है। 170 कॉलेजों से निकले चिकित्सक, नर्सें और पैरामेडिकल कर्मी पूरी निष्ठा से लोगों की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एआई एक बेहतर तकनीक है, जिससे चिकित्सकों को नौकरी जाने की चिंता नहीं करनी चाहिए। एआई से लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवा देने में सहायता मिलेगी, खासकर पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में। यह शोध कार्यों को भी तेजी से आगे बढ़ा सकता है।
चिकित्सा शिक्षा में चुनौतियां
पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी पर प्रो. दुग्गल ने कहा कि सरकार को इन क्षेत्रों में बेहतर सुविधाओं का विकास करना चाहिए। परिवार को अच्छी सुविधाएं देने की लालसा के कारण चिकित्सक वहां जाने से बचते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बड़े महानगरों के आकर्षण और मेडिकल कॉलेजों में परास्नातक सीटों की कमी के कारण है। फर्जी प्रमाणपत्रों पर एमबीबीएस प्रवेश के मामले रोकने के बारे में उन्होंने सुझाव दिया कि पहले अनंतिम प्रवेश और फिर पुलिस प्रमाणीकरण का सुझाव दिया गया। नीट परीक्षा में गड़बड़ी परीक्षा केंद्रों पर सतर्कता बरतकर रोकी जा सकती है।
ये भी पढ़ें...उत्तरकाशी: मोरी के आराकोट में देर रात पुराने स्वास्थ्य भवन में लगी भीषण आग, सेवानिवृत्त एएनएम की जलकर मौत
छात्रों का तनाव कम करना जरूरी
प्रो. दुग्गल ने छात्रों के बढ़ते तनाव को चिंताजनक बताया। इसे रोकने के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों को कनिष्ठ चिकित्सकों का और वरिष्ठ संकाय को अन्य चिकित्सकों का मार्गदर्शक परामर्शदाता बनाना चाहिए। परिवारजनों का लगातार संपर्क और गैर-शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ाकर छात्रों का तनाव कम करने का एक सुनिश्चित प्लान होना चाहिए। उन्होंने मातृभाषा में चिकित्सा शिक्षा की वकालत करते हुए कहा कि इससे डॉक्टर अपने लोगों से बेहतर संवाद कर उनका बेहतर इलाज कर सकेंगे।