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पिता के सपोर्ट से बेटी ने पाया बॉलीवुड में मुकाम

Sat, 18 Jan 2014 06:02 PM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
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सघंर्षों के बीच अगर कोई पिता बच्चों को मुकाम तक पहुंचाने में कामयाब हो जाए तो समझिए मिसाल कायम हो गई।
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अभिनय का लोहा मनवाया
ठीक ऐसे ही बेटी को बेटे जैसी अहमियत देकर पिता ने हिमानी शिवपुरी को जो ख्वाब दे दिए उसकी यादें आज भी उनकी हौसलाआफजाई करती हैं। अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी आज जिस मुकाम पर हैं उसके पीछे कहीं न कहीं उनके साहित्यकार पिता का नाम है।

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बकौल हिमानी अगर पिता स्व. हरिदत्त भट्ट शैलेश मेरा साथ ना देते तो मैं जीवन में वह काम नहीं कर पाती जो मैं करना चाहती थी। दून की रहने वाली अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी ने दर्जनों फिल्मों के जरिए अपने अभिनय का लोहा मनवाया है।
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वह आज एक ऐसा नाम है जिसे भले ही हर कोई जानता हो लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए वह कभी अपने पापा का जिक्र करना नहीं भूलतीं। हिमानी भी अच्छी बेटी साबित हुईं। उन्होंने पापा के बाद ना सिर्फ मां का ख्याल रखना शुरू किया बल्कि पिता की लिखी कहानियों को नाटक के रूप में परिवर्तित कर थियेटर वर्कशॉप भी कराई।

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हिमानी ने बताया कि मेरी श्रद्धांजलि पिता को इसी रूप में होती है कि मैं उनके लिए कुछ कर सकूं। उनकी पहली बरसी पर मैंने उनकी लिखी कहानी सुनहरे सपने को नाटक में परिवर्तित किया। नाटक के लिए एक महीने की वर्कशॉप भी युवाओं के लिए रखी गई और फिर मंचन भी कराया।

अब मेरी तैयारी पिता की लिखी कहानियों पर फिल्म बनाने की है। वह बताती हैं कि पापा उत्तराखंड के कलाकारों से बेहद प्यार करते थे। इसलिए मैं इस फिल्म में यहां के कलाकारों को ज्यादा मौका दूंगी। हिमानी ने बताया कि पिता जी हमेशा कहते थे कि मेरे दो बेटे हैं।

अमेरिका जाने के लिए स्कॉलरशिप मिली
उन्होंने मुझ में और मेरे भाई हिमांशु में कभी फर्क नहीं किया। हिमानी ने बताया कि एमएससी के बाद आगे की पढ़ाई के लिए मुझे अमेरिका जाने के लिए स्कॉलरशिप मिली। सभी बेहद खुश थे। इसी दौरान मैं चुपके से एनएसडी (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) में परीक्षा दे आई थी।

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एक और स्कॉलरशिप थी, अच्छा पैसा था तो दूसरी ओर मेरे सपने। जाहिर है सभी ने अमेरिका जाने के लिए जोर डाला। मैं उदास हो गई तो पिता जी ने हाथ थामा और कहा बेटा कभी कोई काम जबरदस्ती मत करना, जो तेरा मन करे हो वही करना।

मैं खुशी से फूले नहीं समाई और झट से कहा, एनएसडी जाना है। पिता जी के उस साथ की वजह से आज मैं इस मुकाम तक पहुंच पाई हूं। अब मेरा फर्ज बनता है कि मैं उनके सपनों को पूरा करूं।
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यही वजह है कि पिता जी की मौत के बाद मैं अक्सर दून आती रहती हूं। मां का ख्याल और उनके सपने दोनों ही मुझे यहां तक खींच कर ले आते हैं।

पति की मौत के बाद भी संभाला
हिमानी ने बताया कि माता-पिता की वजह से ही मैं पति की मौत के बाद भी संभल पाई। मेरा बेटा कात्यायन तब बेहद छोटा था।

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पिता जी ने अपनी फिक्र किए बिना मां शैल भट्ट को कहा कि इस समय तुम मुंबई रहो, हिमानी को तुम्हारी ज्यादा जरूरत है। मां भी मेरे पास रहना चाहती थी। वह लंबे समय तक यहां रही और दुख में मेरा साथ दिया।
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