हिमालय की ऊंचाई जैसे-जैसे बढ़ रही है भूगर्भ में दबाव के कारण उथल-पुथल तेज होती जा रही है। भारी चट्टानें भूगर्भ में धंस रही हैं और हल्की चट्टानें तेजी से ऊपर की तरफ आ रही हैं, इसी वजह से हिमालय क्षेत्र की सतह पर बदलाव आ रहा है।
वाडिया हिमालय भूगर्भ संस्थान में मंगलवार से शुरू हुई तीन दिवसीय हिमालय-कराकोरम-तिब्बत कार्यशाला में जुटे दुनिया भर के भूगर्भ विज्ञानियों ने यह बात कही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल डॉ. केके पॉल थे। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में राज्यपाल डॉ. पाल ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में भूकंप के बाद भी भूस्खलन होते हैं, विज्ञानी अध्ययन करें कि लैंड स्लाइड भूकंप के प्रभाव से हो रहे अथवा बरसात व अन्य कारण से।
यदि खोज की जाए तो हिमालयी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में खनिज संपदा मिल सकती है। अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ में मैग्नासाइड, तांबा, जस्ता, चांदी जैसे खनिज पदार्थों की व्यापक संभावनाएं हैं। पहाड़ों पर बडे़ बांध बनने से भौगोलिक बदलावों का भी अध्ययन किया जाए। ग्लेशियरों और इको सिस्टम की स्थिति का अध्ययन जरूरी है।
बाद में राज्यपाल ने वाडिया संस्थान परिसर में रुद्राक्ष का पौधा रोपा। इसके बाद दो तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। इसमें बताया गया कि हिमालयी क्षेत्र में मिट्टी का कटाव बड़े पैमाने पर हुआ है। इससे नदियों में मिट्टी बढ़ी है और डेल्टा बन गए।
इसके साथ ही हिमालयी भूगर्भ में रसायनिक प्रतिक्रियाओं, चट्टानों में गैस की स्थिति आदि बिंदुओं पर देश-विदेश के 23 विज्ञानियों ने अपने-अपने शोध की स्लाइड के माध्यम से प्रस्तुति दी। प्रस्तुति देने वाले विज्ञानियों में पीजे ओबरियन, जोनेथन सी. एचीसन, एच. सकाई, डा. राजेश शर्मा आदि रहे। उद्घाटन सत्र में वाडिया के निदेशक डॉ.एके गुप्ता, डॉ.जीपी श्रीवास्तव, डॉ.बीना तिवारी, डॉ.पीएस नेगी आदि मौजूद रहे।