हाईकोर्ट ने 2012-2013 बैच के डिग्री प्राप्त डॉक्टरों की दो साल पहाड़ पर सेवा देने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वर्ष 2012-2013 में जिन छात्रों ने मेडिकल में (पीजी) स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है उन्हें पहाड़ चढ़ने के लिए बाध्य न किया जाए।
यह था मामला
न्यायमूर्ति आलोक सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हल्द्वानी निवासी डॉ. रमेश कुमार गुप्ता और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी से पीजी करने वाले डाक्टरों को दो वर्ष पहाड़ पर अनिवार्य रूप से सेवा देने का बांड भरवाया था।
याचियों का कहना था कि वे 2012-13 बैच के डाक्टर हैं। जब उनसे बांड भरवाया गया था तो पहाड़ पर अनिवार्य सेवा की शर्तें उसमें नहीं थीं। इसलिए जो शासनादेश 8 मई 2013 को जारी किया गया था वह उन पर (याचियों पर) लागू नहीं होता है।
कोर्ट ने पक्ष में दिया फैसला
इस पर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कहा कि यह नियम 2014 के डॉक्टरों पर लागू होता है और इस नियम को 2012-13 बैच के डॉक्टरों पर लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सरकार को इन्हें पहाड़ न भेजने के निर्देश दिए हैं।