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उत्तराखंडः धधकते जंगलों पर हाईकोर्ट गरम, केंद्र से पूछे तीखे सवाल

Wed, 04 May 2016 12:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल

सार

  • - कई बिंदुओं पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब
  • - सोमवार को होगी मामले की अगली सुनवाई  
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नैनीताल के जंगलों मेें आग - फोटो : anup shah photography
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विस्तार
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हाईकोर्ट ने उत्तराखंड के विभिन्न जंगलों में लगी भीषण आग के चलते हो रही जन और जंगल वन्यजीवों की हानि को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को कई बिंदुओं पर अगले सोमवार तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
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हाईकोर्ट में इन द मैटर ऑफ द प्रोटेक्शन ऑफ फॉरेस्ट इंनवायरमेंट इकोलॉजी, वाइल्ड लाइफ की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया कि उत्तरखंड के विभिन्न स्थानों व जंगलों में आग लगने से वन, वन्यजीवों के साथ-साथ मानव हानि भी हो रही है। याचिका में इसकी रोकथाम करने की मांग की गई।

इस मामले में मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस संबंध में कई उपाय किए जा रहे हैं। कोर्ट ने नजीर के रूप में कहा कि हिमाचल प्रदेश में आग पर काबू पाने के लिए जंगलों में 86 वाटर टैंक बने हैं, साथ ही वहां लोगों का एक संगठन भी बना हुआ है।
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कोर्ट ने पूछा, अमेरिका जैसे केमिकल की व्यवस्था क्यों नहीं?

एमआई 17 से बुझाई जा रही जंगलों की आग
इस संदर्भ में कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि उत्तराखंड के जंगलों में कितने वाटर टैंक बनाए गए है? कोर्ट ने यह भी कहा कि अमेरिका में आर्टिफिशियल केमिकल जैसे अमोनिया का प्रयोग किया जाता है, जिससे आग पर तुरंत काबू पा लिया जाता है। इसी क्रम में कोर्ट ने सवाल किया कि भारत की सरकार इस प्रकार की व्यवस्था यहां क्यों नहीं करती? 

आपदा आने के बाद ही सरकार की ओर से राहत राशि की मांग की जाती है और जब तक पैसा आता है तब तक सब खत्म हो जाता है। उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने की घटनाओं के बाद पांच करोड़ रुपये जारी हुए। इसकी व्यवस्था पहले से ही कर लेनी चाहिए, जिससे ऐसी स्थिति आने पर तुरंत उससे निपटा जा सके।
(सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की टिप्पणी)
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हाईकोर्ट ने केंद्र से पूछे हैं ये सवाल

उत्तराखंड में जंगल की आग
इस प्रकरण पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को इन बिंदुओं पर जवाब देने को कहा है।-

1. आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत वनाग्नि पर काबू पाने के लिए राष्ट्रीय स्तर, राज्य स्तर व जिला स्तर पर क्या कार्ययोजना है?
2. क्या स्टेट नोडल अधिकारी द्वारा भारत सरकार से फरवरी से अब तक प्रारंभिक अग्नि चेतावनी प्राप्त की गई थी, यदि हां, तो रोकथाम के क्या उपाय किए गए?
3. आग से शीघ्र निपटने के लिए क्या उपाय किए गए है?
4. इस संबंध में क्या अग्नि विभाग तथा वन विभाग में कोई समन्वय है। इसमें जनबल और वनाग्नि से लड़ने हेतु उपकरण की क्या व्यवस्था है?
5. यह स्पष्ट करें कि वनाग्नि किसी व्यक्ति द्वारा लगाई है या प्राकृतिक?
6. आग की घटनाओं को लेकर कितने केस रजिस्टर हुए, क्या एक्शन लिया गया और क्या जांच की गई?
7. दावाग्नि किस प्रकर की है - ग्राउंड फायर, सरफेस फायर या क्राउन फायर?
8. राज्य में वनाग्नि का वर्तमान स्थिति- कितनी मृत्यु हुई, किनते वृक्षों को हानि हुई तथा वृक्षों के प्रकार?
9. यदि वे पाइन वृक्ष थे तो क्या कोई प्लान है पाइन वृक्ष को किसी दूसरे वृक्ष में परिवर्तित करने के लिए?
10. हिमाचल प्रदेश की भांति क्या वन क्षेत्र में वाटर टैंक की व्यवस्था है?
11. आग बुझाने के लिए कोई कमेटी की व्यवस्था है, जिसमें लोकल व्यक्ति सम्मिलित हो?
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