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श्रद्घालु रवाना, कल खुलेंगे हेमकुंड के कपाट

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जो बोले सो निहाल के जयकारों के साथ हेमकुंड साहिब के लिए रविवार की सुबह सिख यात्रियों का जत्था रवाना हो गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सुबह नौ बजकर 55 मिनट पर सिख तीर्थयात्रियों के जत्थे को सरोपा भेंट कर किया।
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जिसके बाद 1500 से अधिक तीर्थयात्री हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हो गए। यात्रियों का जत्था जो बोले सो निहाल के जयकारे के साथ हेमकुंड साहिब के लिए हुआ रवाना। आज यात्रा के प्रमुख पड़ाव घांघरिया पर जत्था पहुंचेगा।

जिसके बाद सोमवार की सुबह यह जत्था हेमकुंड साहिब धाम पहुंचेगा। एक जून को सुबह नौ बजे हेमकुंड साहिब के कपाट खुल जाएंगे। कपाट खुलने के मौके पर हेमकुंड में करीब छह हजार तीर्थयात्रियों के मौजूद रहने की उम्मीद है।
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यहां आस्था पथ पर अटलाकोटी से हेमकुंड तक तीन किमी पैदल मार्ग पर बर्फ होने से तीर्थयात्रियों को दिक्कतें उठानी पड़ सकती हैं, लेकिन हेमकुंड साहिब के लिए निकले तीर्थयात्रियों की आस्था, उत्साह और जुनून देखते ही बन रहा है।

इससे पहले सीएम रावत रविवार को सुबह नौ बजकर 15 मिनटर पर हेलीकॉप्टर से गोविंदघाट पहुंचे। सबसे पहले सीएम ने गोविंदघाट गुरूद्वारे में आयोजित अरदास में भाग लिया। सीएम ने सिख तीर्थयात्रियों को हेमकुंड धाम के लिए रवाना करते दौरान तीर्थयात्रियों को बारिश और बर्फबारी में सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने का आह्वान किया।

गोविंदघाट में सिख रेजीमेंट की बैंड धुनों के साथ तीर्थयात्री रवाना हुए। हेमकुंड साहिब और यात्रा पड़ावों पर रविवार को मौसम साफ रहा। करीब छह सौ तीर्थयात्री पहले ही हेमकुंड साहिब पहुंच गए। कई तीर्थयात्री पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, अमृतसर, रीठासाहिब से पैदल गोविंदघाट पहुंचे हैं।

आस्था पथ पर तीन किमी तक जमी है बर्फ

हेमकुंड साहिब में अब भी करीब चार फीट बर्फ जमी हुई है। घांघरिया में भी निचली चोटियों पर बर्फ जमी हुई है, जिससे दोपहर बाद यहां बर्फीली हवाएं चल रही हैं। तीर्थयात्री अपने साथ यहां पर्याप्त गर्म कपडे़ लेकर आएं। अपने साथ सिर दर्द, बदन दर्द और बुखार की दवा भी साथ लेकर आएं।

हेमकुंड साहिब धाम के लिए तीर्थयात्री तीन किमी तक बर्फीले रास्ते से होकर गुजरेंगे। यहां पैदल मार्ग पर जगह जगह प्रशासन ने रस्सियां लगाई हुई हैं, जिनके सहारे तीर्थयात्री आस्था पथ पर आगे बढ़ेंगे। यह तीन किमी पैदल मार्ग अटलाकोटी हिमखंड से हेमकुंड साहिब तक है।

अटलाकोटी से आगे घोड़े-खच्चरों की आवाजाही भी नहीं होगी। लिहाजा यात्रियों को पैदल ही यह तकलीफदेह रास्ता पार करना होगा। तीन किमी के इस पैदल रास्ते पर वन वे सिस्टम होगा। हेमकुंड साहिब से लौटने वाले यात्रियों के जत्थे के बाद ही दूसरा जत्था अटलाकोटी से रवाना होगा।

यहां चप्पे-चप्पे पर पुलिस और एसडीआरएफ के जवान तैनात रहेंगे। जिलाधिकारी अशोक कुमार का कहना है कि चटख धूप में हिमखंड पिघल रहे हैं। बर्फ एक माह के भीतर पिघल जाएगी, जिसके बाद रास्ता सुगम हो जाएगा।

सात शिखरों के बीच स्थित है हेमकुंड साहिब
श्री हेमकुंड साहिब धाम सात शिखरों के बीच 4329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मान्यता है कि सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह ने यहां तपस्या की थी। बताया जाता है कि वर्ष 1933 में टिहरी के ग्रंथी संत सोबन सिंह ने इस स्थान की खोज की थी।

इसके बाद अहोलदर बाबा मोदन सिंह ने यहां भव्य गुरुद्वारे का निर्माण कराया। श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे के पास ही पवित्र सरोवर और लक्ष्मण मंदिर स्थित है। हेमकुंड साहिब पहुंचने के लिए तीर्थयात्रियों को गोविंदघाट से पुलना तक तीन किमी वाहन से और 16 किमी का पैदल सफर तय करना पड़ता है।

डंडी-कंडी और घोड़े की है सुविधा
हेमकुंड साहिब की पैदल यात्रा को सुखद बनाने के लिए गोविंदघाट में डंडी, कंडी और घोड़ों की व्यवस्था भी है। गोविंदघाट से अटलाकोटी तक 16 किमी पैदल मार्ग पर घोड़े पर जाया जा सकता है।

इससे आगे तीन किमी पैदल मार्ग बर्फीला होने के कारण प्रशासन ने इस बार यहां घोड़े की आवाजाही रोक ली है जबकि डंडी-कंडी से तीर्थयात्री हेमकुंड साहिब तक जा सकते हैं।

डंडी संचालक वजन के हिसाब से तीन दिन का पैकेज लेकर तीर्थयात्रियों को हेमकुंड तक ले जाते हैं। एक दिन गोविंदघाट से घांघरिया तक जाया जाता है। दूसरे दिन  हेमकुंड साहिब के दर्शन कर पुन: घांघरिया और तीसरे दिन गोविंदघाट आते हैं।
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गोविंदघाट से हेलीकॉप्टर की भी व्यवस्था

हेमकुंड साहिब पहुंचने के लिए इस बार गोविंदघाट से हेलीकॉप्टर की भी व्यवस्था है। तीर्थयात्री गोविंदघाट से 14 किमी दूर स्थित कांजिला तक हेलीकॉप्टर से जा सकते हैं। यहां से धाम तक पांच किमी की पैदल यात्रा उन्हें फिर भी करनी होगी। यहां डेक्कन कंपनी का हेलीकॉप्टर अपनी सेवाएं देगा।

हेलीकॉप्टर में जाने का किराया 3200 रुपए और आने-जाने का किराया 6400 रुपए रखा गया है। हेमकुंड साहिब यात्रा की तैयारियों का जायजा लेने गोविंदघाट पहुंचे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जोशीमठ से भी हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक सेवा शुरू करने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।

दोपहर दो बजे बाद हेमकुंड जाने की नहीं होगी अनुमति
गुरुद्वारा प्रबधंन कमेटी ने तीर्थयात्रा की समय सारिणी तय की है। तय किया गया कि दोपहर दो बजे के बाद गोविंदघाट से किसी भी तीर्थयात्री को हेमकुंड साहिब जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सुबह से ही दोपहर दो बजे तक तीर्थयात्रियों को पांच से 10 लोगों के जत्थे में गोविंदघाट से भेजा जाएगा। बारिश और  बर्फबारी होने पर तीर्थयात्रियों को भ्यूंडार, घांघरिया, गोविंदघाट और हेमकुंड धाम में रोक लिया जाएगा। गोविंदघाट से पुलना तक तीर्थयात्री वाहन से जाएंगे।

यात्रा से संबंधित जानकारी के लिए यहां संपर्क करें
ऋषिकेश गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी- 7500241970, 71 और 72
जोशीमठ गुरुद्वारा- 7500241976
गोविंदघाट गुरुद्वारा कमेटी- 7579041090
वेबसाइट- डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट गुरुद्वाराश्री हेमकुंड साहिब डॉट कॉम।

यात्रा के दौरान यहां है ठहरने की व्यवस्था
यात्रा  के दौरान तीर्थयात्री गुरुद्वारा हरिद्वार, ऋषिकेश, श्रीनगर, नगरासू, जोशीमठ, गोविंदघाट और गोविंदघाम घांघरिया में रात्रि विश्राम के लिए ठहर सकते हैं। यहां खानपान की भी उचित व्यवस्था रहती है। इन गुरुद्वारों में प्रतिदिन लंगर भी लगते हैं। यात्रा मार्ग पर कई जगहों पर लंगर भी लगने शुरू हो गए हैं। भकुंडा और नंदप्रयाग में भी लंगर की व्यवस्था है।
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