सिखों के प्रसिद्ध तीर्थ हेमकुंड साहिब यात्रा जून माह से शुरू होगी, लेकिन तीर्थयात्रा का 20 किमी पैदल मार्ग अभी तक भी बदहाल स्थिति में है।
स्थायी पुल का काम शुरू नहीं हो पाया
आपदा में यहां चार स्थानों पर पैदल पुल बह गए थे। तब तत्काल तीर्थयात्रा को शुरू करने के लिए पीडब्लूडी ने लकड़ी के वैकल्पिक पुलों का निर्माण किया था। इसके बाद अभी तक एक भी स्थान पर स्थायी पुल का काम शुरू नहीं हो पाया।
समय रहते इन पुलों को नहीं बदला गया तो, इस बार की बरसात में भी तीर्थयात्रा बाधित कर सकती है। बीते साल 17 जून से 20 सितंबर तक हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा ठप पड़ी रही।
21 सितंबर को अव्यवस्थाओं के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने दोबारा यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
लोक निर्माण विभाग ने यात्रा पड़ाव भ्यूंडार के साथ ही चार स्थानों पर पैदल मार्ग पर लकड़ी की अस्थायी पुल तीर्थयात्रियों के चलने लायक बनाया था।
इस वर्ष की तीर्थयात्रा के लिए पैदल मार्ग का सुधारीकरण कार्य भी अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। जो इस बार की यात्रा में परेशानी का सबब बन सकता है।
कमजोर पुल झेल पाएं तीर्थयात्रा
जलप्रलय से गोविंदघाट में गुरुद्वारा और धर्मशाला के साथ ही हेमकुंड साहिब को जाने वाला पैदल झूला पुल भी बह गया था।
दो माह के भीतर लोनिवि ने हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा को दोबारा शुरू करवाने के लिए अलकनंदा पर बल्लियां लगाकर पुल निर्माण किया, लेकिन कमजोर पुल इस बार की तीर्थयात्रा नहीं झेल पाएगा।
हेमकुंड साहिब पैदल मार्ग के लिए विभाग को दैवी आपदा से 414 लाख रुपए मिल गए हैं। अलकनंदा पर 4 करोड़ 32 लाख का पैदल पुल बनाया जा रहा है। ठंड के कारण इन दिनों पुल निर्माण कार्य रुका हुआ है। यात्रा शुरू होने से पहले पुल निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया है।
- रमेश चंद्र पाल, ईई, लोनिवि, चमोली
हेमकुंड साहिब पैदल मार्ग अभी भी बदहाल पड़ा हुआ है। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने पैदल मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया है। बरसात में भ्यूंडार पड़ाव के पास लड़की का पुल परेशानी पैदा कर सकता है। लोनिवि को कार्य में तेजी लाने की आवश्यकता है।
- सरदार सेवा सिंह, प्रबंधक गुरुद्वारा कमेटी