केदारनाथ के लिए संचालित हेलीकॉप्टर सेवा का केदारघाटी के बाजारों पर भी असर पड़ा है। फाटा, सोनप्रयाग और गौरीकुंड तक ये यात्री नहीं पहुंच रहे हैं। इससे कारोबारियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। बाबा केदार के दर्शन करने वाले 52 हजार श्रद्धालु हेलीकॉप्टर से पहुंचे हैं।
आपदा के बाद इस वर्ष केदारनाथ की यात्रा को लेकर एक नया उत्साह दिखाई दिया। 24 अप्रैल से 29 अप्रैल तक केदारनाथ पहुंचने वाले यात्री पैदल रास्ते से धाम पहुंचे। इसका लाभ गुप्तकाशी, फाटा, सोनप्रयाग, गौरीकुंड और पैदल यात्रा मार्ग के पड़ावों पर खुली दुकानों को मिला। इस दौरान दस हजार के अधिक यात्री पहुंचे।
30 अप्रैल से शुरू हुई हवाई सेवा के बाद से फाटा, सोनप्रयाग, गौरीकुंड और पैदल पड़ाव की दुकानें, पैदल यात्रा पर ही निर्भर रह गई।
55 हजार यात्री हेलीकॉप्टर से पहुंचे, 52 हजार पैदल
1 मई से 5 अगस्त तक तक हेलीकॉप्टर से 55 हजार से अधिक यात्री पहुंचे। जबकि पैदल रास्ते से 52 हजार पहुंचे।
सोनप्रयाग में व्यवसायी मुकेश गोस्वामी का कहना है कि इस वर्ष कपाट खुलने के बाद से यात्रा से व्यवसाय को भी गति मिली। लेकिन हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने से 30 से 40 प्रतिशत व्यवसाय में गिराव आई।
गौरीकुंड के नरोत्तम गोस्वामी का कहना है कि गौरीकुंड को इस यात्रा से जो उम्मीदें थी, वह शुरू के पांच दिन तक फलीभूत होती दिखी। लेकिन हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने से कम संख्या में यात्री पहुंचे। होटल, लॉज, रेस्टोरेंट को भी अपेक्षाकृत 20 से प्रतिशत कम बुकिंग मिली।
घोड़ा, खच्चर, डंडी-कंडी से लेकर चाय की दुकान से लेकर ढाबे पर भी असर पड़ा। गुप्तकाशी के व्यापार संघ अध्यक्ष प्रेम सिंह नेगी बताते हैं कि अंधाधुंध हेलीकॉप्टर की उड़ान ने स्थानीय व्यवसाय प्रभावित हुआ है। हेलीकॉप्टर के कारण केदार की यात्रा करने वाला यात्री बाजारों में नहीं पहुंच रहा है।