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बारिश से हुई बर्बादी पर बेफिक्र सरकार

Tue, 19 Aug 2014 11:42 AM IST
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून के बांदल घाटी में आपदा से प्रभावित गांव किस हाल में है, यह जिला प्रशासन को पता है न सरकार को।
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प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंच पाया प्रशासन
जिला प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम सरखेत से आगे नहीं बढ़ पाई है। बेफिक्री का आलम यह है कि जिला प्रशासन ने सोमवार को आपदा पीड़ितों को सरखेत आकर राशन लेने का फरमान जारी कर दिया।

जबकि आपदाग्रस्त आखिरी गांव क्यारा, सरखेत से 15 किमी दूर है। सवाल यह है कि जब प्रशासन प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंच पाया, तो भला लोग सरखेत तक कैसे पहुंचेंगे?
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15 अगस्त को आई आपदा के बाद बांदल घाटी में हाहाकार की स्थिति है। सरखेत (पीपीसीएल) से ऊपर 15 गांवों को जोड़ती आठ किलोमीटर सड़क को नामोनिशान तक नहीं बचा है।

शेरकी, ताछिला, छमरोली, फुलेथ, भैंसवाड़ासैण, भैंकलीखाला, छोटी छमरोली, कोलठियाना, कखवाड़ी, सिनयारी, क्यारा, गोट, जमठियाल गांव, भूत्सी, सरोना आदि गांव का संपर्क अब भी देहरादून और टिहरी जिले से कटा हुआ है।

इन गांवों में हुए नुकसान का अभी तक आकलन नहीं हो पाया है।

विधायक, डीएम ने बांटे चेक
जिलाधिकारी चंद्रेश यादव व विधायक उमेश शर्मा (काऊ) आपदा के तीन दिन बाद सरखेत पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पीड़ितों को राहत राशि के चेक बांटे और राहत शिविर में लोगों को हाल जाना।

प्रशासन का दावा है कि पीडब्ल्यूडी सरखेत से आगे रास्ता बनाने में जुटा हुआ है। सरखेत पहुंचे एसडीएम मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि मंगलवार को जिला पूर्ति आधिकारी राशन लेकर सरखेत पहुंचेंगे।

उन्होंने बताया कि प्रभावित गांवों से लोगों को सरखेत आकर ही राशन ले जाना होगा।

क्यारा से दून दो दिन में
धनौल्टी ब्लाक के क्यारा गांव से कुछ लोग सोमवार को सरखेत पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनकी नगदी फसल के साथ ही मवेशी पानी में बह गए।

क्यारा से 15 किलोमीटर दूर सरखेत आने में इन लोगों को दो दिन का समय लगा। लोगों ने आरोप लगाया कि न प्रशासन और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने उनका हाल जानने की कोशिश की।

कैसे होगा इलाज, कैसे पढ़ेंगे बच्चे
पुल और सड़क बाढ़ में बह गए। अब बच्चे कई महीने तक स्कूल नहीं जा पाएंगे। उनका भविष्य तो बर्बाद हो गया साहब। गर्भवती महिलाओं का क्या होगा, इसके बारे में तो अभी किसी ने कुछ सोचा ही नहीं।

बैंक से लोन लेकर किसी ने घर बनाया था तो किसी ने मवेशी खरीदे। अब सब खत्म हो गया। सोमवार को क्यारा और उसके आसपास के गांव से आए कुछ लोगों ने अपना दर्द सामने रखा तो आपदा की भयावह तस्वीर उजागर हुई।
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भानू उनियाल ने बताया कि टूटी सड़क किसी भी हाल में साल भर से पहले नहीं बन पाएगी। ऐसे में अब 15 किमी पैदल चलकर बीमारों और घायलों को देहरादून लाना होगा।

खेत पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं, ऐसे में रोजीरोटी का एकमात्र जरिया भी छिन गया। सावित्री देवी बताती हैं कि उनकी बहू बीमार है। किसी तरह उसे देहरादून लेकर आए हैं। एक दिन राहत शिविर में रहने के बाद अब दून में किसी रिश्तेदार के घर शरण लेनी पड़ेगी।
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