केदारनाथ पूजा को लेकर बृहस्पतिवार को भी कांग्रेस की अंदरूनी सियासत गरमाई रही। कांग्रेस प्रदेश महामंत्री विजय सारस्वत को कहना पड़ा कि यह सरकारी पूजा नही है।
पर महाराज के पूजा के मुहूर्त के सही न होने की शिकायत पर सारस्वत ने चुप्पी साध ली।
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उत्तराखंड आपदा से उबर चुका
कांग्रेस भवन में मीडिया से मुखातिब सारस्वत ने कहा कि केदारनाथ में पूजा शुरू करके यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि उत्तराखंड आपदा से उबर चुका है।
चार धाम यात्रा जल्द शुरू होने की संभावना इससे बढ़ी है। चार धाम यात्रा का सीधा संबंध प्रदेश की अर्थव्यवस्था और पर्यटन से है। प्रदेश को इस यात्रा के रुक जाने का खासा नुकसान हो रहा है।
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सारस्वत के मुताबिक केदारनाथ में पूजा तो मंदिर समिति की ओर से हुई है। इसे सरकारी पूजा कह कर प्रदेश सरकार की ओर से हो रही कोशिश को विफल करने की साजिश है।
छवि को नुकसान
दूसरी ओर कांग्रेस भवन में नजर आए पूर्व सांसद महेंद्र पाल को भी कांग्रेसियों के सवालों का जवाब देना पड़ा। एक कांग्रेसी नेता का कहना था कि केदारनाथ की पूजा में सरकार को सीधे तौर पर शामिल नही होना चाहिए था।
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कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष पार्टी है। ऐसे में किसी धर्म विशेष की मान्यता के आधार पर पूजा कराने में सरकार के शामिल होने से कांग्रेस की इस छवि को नुकसान पहुंच सकता है।