पूर्व मुख्यमंत्रियों से बाजार दर पर किराया वसूली के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर 25 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।रुलक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दे दिया है। कहा गया है कि हाईकोर्ट का आदेश लागू नहीं हुआ तो सरकारी आवासों पर होता रहेगा कब्जा
पूर्व मुख्यमंत्रियों से बाजार दर पर किराया वसूलने के उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 25 फरवरी को सुनवाई होगी। रुलक संस्था के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने यह जानकारी दी।
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वहीं, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रुलक संस्था ने इस मामले में अपना जवाब दाखिल कर कहा है कि तीन साल तक चली हर सुनवाई में पूर्व मुख्यमंत्रियों के अधिवक्ता उपस्थित रहे, तब आपत्ति नहीं उठाई गई। यदि यह आदेश लागू नहीं हुआ तो भविष्य में हर सरकारी आवास का कब्जेदार सरकारी दर पर किराया जमा कर आवास पर कब्जा कर लेगा।
हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से किराए के लगभग 2.75 करोड़ रुपये और सुविधाओं का करीब 20 करोड़ रुपये बकाया बाजार दर से वसूलने के आदेश दिए थे। नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों का किराए और सुविधाओं का बकाया माफ करने का अधिनियम रद कर दिया था।
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कोर्ट के आदेश पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने बकाया जमा कर दिया था जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी, पूर्व सीएम विजय बहुगुणा, पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी तथा राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। उन्होंने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध बताते हुए हाईकोर्ट के इस आदेश को रद्द करने की प्रार्थना की है। पूर्व मुख्यमंत्रियों के अनुसार बाजार दर तय करते समय हाईकोर्ट ने उनका पक्ष नहीं सुना।