केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में लखनऊ में हुई मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में बेशक तकरीबन 35 बिंदुओं पर चर्चा की गई मगर मुख्यमंत्री हरीश रावत अपना एजेंडा खुद तय करके गए थे।
बैठक में रावत का भाषण उत्तर प्रदेश से चले आ रहे विभिन्न विवादों की जगह केंद्र सरकार पर ज्यादा केंद्रित था। सीएम ने विभिन्न मुद्दों के अलावा सीमांत क्षेत्र की सड़कों का मामला भी उठाया।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में लखनऊ में हुई मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने की मांग भी केंद्र सरकार के सामने रखी।
हाइड्रो प्रोजेक्ट, संवेदी क्षेत्र और ग्रीन बोनस पर की बात
सीएम के भाषण में हिमाचल से जुड़ी लखवाड़ जल विद्युत परियोजना और किसाऊ जल विद्युत परियोजना भी शामिल थीं।
राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की परियोजनाएं थीं और केंद्र के प्रतिबंधों से राज्य को हो रहे 1650 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष की क्षतिपूर्ति का सवाल उठा। भागीरथी नदी के किनारे घोषित संवेदी क्षेत्र का मामला और ग्रीन बोनस भी केंद्र सरकार से संबंधित मुद्दों में शामिल था।
राज्य पुलिस बल के आधुनिकीकरण की मांग
राज्य पुलिस बल केआधुनिकीकरण के लिए केंद्र पोषित योजना के साथ अर्द्धकुंभ के लिए 55 करोड़ की योजना की मंजूरी थी। केंद्रीय गृह मंत्री अध्यक्ष थे लिहाजा राज्य में कारागार और जेल सुरक्षा के लिए मांगे 158.08 करोड़ का प्रस्ताव भी उनके सामने पेश किया।
परिसंपत्तियों के बंटवारे का मामला उठाया
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच लंबित परिसंपत्तियों एवं दायित्वों का बंटवारा शीघ्र करने के साथ जमरानी बांध के लिए शीघ्र एमओयू जैसे मुद्दे भी उठे। सालों से लंबित रेल सेवाओं का विस्तार आदि पर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध भी शामिल था।
बैठक में सिंचाई विभाग की परिसंपत्तियों के बंटवारे में 88 नहरें, 6 बांध/बैराज, 13813.433 हेक्टेयर भूमि, 4027 आवासीय भवन, तथा 357 गैर-आवासीय भवन का जिक्र उठा। सीएम ने अमर उजाला को बताया कि कुछ नहरों और जमरानी बांध पर जल्द ही हल निकल जाएगा।
यूपी के साथ नहरों के हस्तांतरण की बात भी केंद्र को बीच में रखकर ही पेश की गई। सीएम ने कहा कि सचिव जल संसाधन मंत्रालय के साथ हुए निर्णय में उत्तराखंड की भौगोलिक सीमा में आने वाली 41 नहरों काहस्तांतरण किया जाना था।
साथ ही छह बांधों/जलाशयों को उत्तराखंड को सौंपने की कार्यवाही भी लंबित है। नैनीताल में गौला नदी पर प्रस्तावित बहुउद्देशीय परियोजना के अर्से से लंबित होने का मुद्दा भी रावत ने उठाया।
फारेस्ट क्लीयरेंस आसान बनाने की मांग की
उत्तराखंड समेत चारो राज्यों ने वन संरक्षण अधिनियम को शिथिल करने पर जोर दिया। उत्तराखंड का कहना था कि फारेस्ट क्लीयरेंस के कारण उनके तमाम प्रोजेक्ट लटके हुए हैं। यूपी और मध्य प्रदेश ने भी इस मुद्दे पर उनका समर्थन किया।
सिंचाई विभाग की परिसंपत्तियों को लेकर यूपी के सिंचाई मंत्री ने जल्द हल निकालने का आश्वासन दिया है। निकट भविष्य में दोनों राज्यों के मुख्य सचिव बैठेंगे। सीएम अखिलेश ने जमरानी बांध और कुछ नहरों पर सकारात्मक हल की बात कही है।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री