उत्तराखंड के कृषि मंत्री हरक सिंह रावत और मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच ‘तबादला विवाद’ ने खाई कुछ बढ़ा दी है।
इशारों में कह दी मन की बात
उद्यान विभाग की राज्य स्तरीय संगोष्ठी में दोनों ने इशारों में अपने मन की बात कह दी। कृषि मंत्री ने सफाई दी कि वह नियम नहीं तोड़ते, जबकि मुख्यमंत्री का कहना था कि अगर सब काम सीधे होने लगें तो मंत्री (हरक) उन्हें नमस्ते करना भी छोड़ देंगे।
हाल ही में कृषि मंत्री ने अपनी पत्नी पौड़ी जिला पंचायत अध्यक्ष और शिक्षिका दीप्ति रावत का तबादला आदेश सीधे मुख्यमंत्री हरीश रावत से जारी करवा दिया था। हालांकि, नियमविरुद्ध होने के कारण प्रकरण शासन स्तर पर लटक गया।
बताया जा रहा है कि सीएम के आदेश के बावजूद तबादला न होने से हरक खफा हैं। गुरुवार को मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री का आमना-सामना हुआ तो दोनों की राय जुबां पर आ ही गई।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि कृषि मंत्री कुछ मामलों में उनसे सीधे ही अनुमोदन ले लेते हैं। कहा कि वित्त विभाग वाले दिक्कत न करते तो हरक नमस्ते करना भी छोड़ देते। सब काम सीधे होने लगें तो मेल-मुलाकात ही न हो।
इससे पूर्व कृषि मंत्री ने इशारों में नाराजगी जताई। बोले, कुछ मामलों में नियमों की अनदेखी जरूर की है, लेकिन नियम तोड़े नहीं हैं। मंत्री का कहना था कि जो काम दो दिन में होना चाहिए, पत्रावली के चक्कर में वो दो महीने के लिए लटक जाते हैं। कहा, अगर मरीज को आक्सीजन मिलने में दो माह का वक्त लगे तो उसकी जान कैसे बचे?
उठते रहे हैं सवाल
कृषि मंत्री हरक सिंह रावत पर नियमों की अनदेखी पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। कुछ ही समय पूर्व मंत्री ने उपनल के जरिये विभिन्न विभागों में कार्यरत 18 हजार कर्मचारियों के मानदेय में दस फीसदी बढ़ोतरी का आदेश सीधे मुख्यमंत्री से करवा दिया था। फाइल शासन में पहुंची तो वित्त विभाग ने इस पर आपत्ति लगा दी। अब मामला लटका हुआ है।