मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सदन में पहले दिन अपने कुछ अनुभव व लोकतांत्रिक प्रणाली का अनुभव सदस्यों को बांटा। हरीश के भाषण में शब्दों की जादूगरी के साथ कूटनीतिक छाया भी दिखी।
प्रश्नकाल को तो हरीश नहीं बचा सके लेकिन शून्यकाल शुरू होते ही विपक्ष के वेल में दिए गए धरने को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने संसदीय प्रणाली में इसे सदस्यों का अधिकार बताया।
निशंक की तारीफ
उन्होंने कहा कि संसदीय शासन प्रणाली के तहत पारस्परिक बातचीत से ही हल निकलेगा। लोकतंत्र को मजबूती तभी मिल सकती है जब समाधान का रास्ता खोजने की कोशिश हो।
इस सदन की गरिमा को बढ़ाने में देश में लोकतंत्र के अग्रदूत माने जाने वाले पंडित एनडी तिवारी से लेकर (सामने की तरफ इशारा करते हुए) निशंक जी तक का पूरा योगदान रहा।
भट्ट की भी की बड़ाई
हरीश फिर नेता प्रतिपक्ष की तरफ घूमे और कहा कि भट्ट टफ कम्पटीटर हैं, मैं उन्हें बचपन से जानता हूं, उन्हें जीतना बहुत मुश्किल है लेकिन साथ लेना सहज है।
सुनाया संस्मरण
विधानसभा में सवाल लगाने को लेकर हरीश ने अपना संस्मरण सुनाया। उन्होंने कहा कि मैं 27 साल की उम्र में ही सांसद बन गया लेकिन मेरे सवाल सबसे ज्यादा होते थे और उन सवालों के सदन में आने से समाधान भी हुआ।
इसलिए मैंने यह व्यवस्था की है कि यदि प्रश्नकाल यदि नहीं भी चले तो उनका जवाब सदस्य तक पहुंचने के साथ ही समाधान किया जाएगा।