हरक ने बढ़ाई सक्रियता
हरीश भले ही मैदान में उतरने में बहुत सहज हों लेकिन विस चुनाव के दौरान भाजपा से कांग्रेस में लौटे पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की वजह से इस समय वह कुछ असहज हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि हरक सिंह रावत की हरिद्वार में बढ़ी सक्रियता बता रही है कि वे लोस चुनाव में ताल ठोकने को बेताब हैं। उन्होंने अपनी दावेदारी की संभावना से इंकार भी नहीं किया है। हालांकि, हरीश खेमे का तर्क है कि हरक इस शर्त पर ही कांग्रेस में लौटे हैं कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। इस बीच दोनों दिग्गजों की दावेदारी के बीच प्रदेश कांग्रेस असहज है। पार्टी नेताओं का मानना है कि टिकट की दावेदारी से पहले सांगठनिक मजबूती का सवाल है, जिसके दम पर चुनाव लड़ा जाना है।
ये भी पढ़ें...Lok Sabha Elections: निशंक के किले में टिकट के दावेदारों की हलचल, इन नेताओं के दौरों से अटकलों ने पकड़ा जोर
कांग्रेस में प्रत्याशियों के चयन की एक प्रक्रिया होती है। हाईकमान के स्तर से पेनलिस्ट भेजे जाते हैं, जो ब्लॉक स्तर तक कार्यकर्ताओं की राय जानते हैं। इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के स्तर से भी तीन-तीन नामों के पैनल भेजे जाते हैं। अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान के स्तर से ही लिया जाता है। उत्तराखंड में पीसीसी ने आम चुनाओं के लिए अपने स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। संभावित उम्मीदवारों के नाम भी सामने आने लगे हैं, लेकिन अभी इसका खुलासा नहीं किया जा सकता। - करन माहरा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उत्तराखंड