मासूम के साथ जिस मकान में दरिंदगी हुई मोहल्ले वालों ने पहली बार उसके अंदर कदम रखा। अंदर एशोआराम की सुविधाएं देख मोहल्ले वाले दंग रह गए। दो दशक में फर्श से अर्श तक पहुंचा राजीव कुमार पेशे से प्रॉपर्टी डीलर और कपड़े का बड़ा व्यापारी है। मोहल्ले में उसके दो मकान हैं। घटना स्थल वाला मकान करीब 15 साल पहले खरीदा है, जबकि दूसरा मकान दो साल पहले ही लिया है। राजीव का मोहल्ले में किसी से मेलजोल नहीं है।
इसलिए मोहल्ले के लोगों का उसके घर आना जाना नहीं था। वह अक्सर अपने घर में आता था और चला जाता था। भांजा रामतीरथ यादव केयरटेकर के रूप में वहां रहता था। मोहल्ले के लोग यही समझते थे कि रामतीरथ नौकर है। मोहल्ले के लोगों को घटना के दिन ही पता चला वह राजीव का भांजा है। शनिवार को ही मासूम के गायब होने पर तलाशी लेने मोहल्ले के लोग और मासूम के परिजन राजीव के घर के अंदर गए। तीन मंजिला मकान बाहर से बदरंग है।
सालों से रंगाई पुताई तक नहीं है। लेकिन घर के अंदर एशोआराम की हर सुविधा है। हर कमरे में आलीशान बेड और सोफे लगे हैं। शराब की बोतलें और जरूरत का हर सामान है। मोहल्ले के लोगों का यह भी आरोप है कि घर अय्यासी का अड्डा था। रात को लंबी लंबी गाड़ियां आती थी और सुबह उजाले से पहले चली जाती थी।
आरोपी रामतीरथ यादव के पुलिस को दिए बयान के मुताबिक दरिंदगी उसने अकेले की है। आरोपी के बयान से कालोनी के लोग और मासूम के परिवार वाले यकीन करने को तैयार नहीं हैं। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि राजीव दरिंदगी में शामिल नहीं था तो भागा क्यों।
राजीव ने अपने भांजे को बचाने के लिए पुलिस और कालोनी के लोगों को गुमराह किया। दोनों रात के अंधेरे में शव को ठिकाना लगाने चाहते थे। मासूम के परिजनों और कालोनी के लोगों ने आशंका जताई है कि घटना को दो से अधिक लोगों ने अंजाम दिया है। इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।