उत्तराखंड की हाईप्रोफाइल हरिद्वार संसदीय सीट पर उम्मीदवार का फैसला मुख्यमंत्री हरीश रावत पर छोड़ा गया है।
हरीश रावत की उलझन सिर्फ इतनी नहीं है कि पार्टी परिवार या खुद के परिवार से किसे उम्मीदवार बनाएं, बल्कि घर में बने पैनल को लेकर फैसला ज्यादा मुश्किल दिख रहा है।
एक तरफ पत्नी रेणुका रावत हैं दूसरी ओर बेटी अनुपमा रावत।
घर का ही कोई प्रतिनिधि
प्रदेश कांग्रेस चाहती है कि महिला उम्मीदवार के तौर पर जो सीट दी जानी है वह हरिद्वार ही हो। हरीश रावत मानते भी हैं कि उनकी सीट पर अगर घर का ही कोई प्रतिनिधि होता है तो मतदाताओं में सीधा मैसेज जाता है।
हालांकि स्थानीय स्तर इस बार की भी कोशिशें कर रहे हैं पार्टी परिवार से किसी एक नाम पर सहमति बन जाए।
हरीश रावत के पारिवारिक सूत्रों का कहना है कि पत्नी और बेटी में उम्मीदवार किसे बनाया जाए इस पर फैसला लेना कठिन है।
पत्नी जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं
पत्नी रेणुका अल्मोड़ा सीट से एक बार यह जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। हालांकि वह चुनाव हार गई थीं। वहीं बेटी अनुपमा ने हरीश रावत की गैरहाजिरी में उनकी राजनीतिक विरासत को संभाला है।
हाल के तमाम कार्यक्रमों में अनुपमा ही सक्रिय दिखी हैं। बेटे आनंद की पृष्ठभूमि भी राजनैतिक है लेकिन रावत ने उन्हें फिलहाल चुनावी दंगल से अलग रखा है।
धार्मिक अनुष्ठान और ज्योतिषी परामर्श को महत्व
हरीश रावत भी उन राजनेताओं में शामिल हैं जो धार्मिक अनुष्ठान और ज्योतिषी परामर्श को भी पूरा महत्व देते हैं।
सूत्र बताते हैं कि रावत यह भी जान लेना चाहते हैं कि इस समय पत्नी या बेटी में किसके सितारे अधिक बुलंद हैं जो गंगा नगरी में उनकी नैया पार लगा दे। पत्नी ने रावत की ऐसे समय में मदद की थी जब वह लगातार अल्मोड़ा सीट से हारे थे।
बदले राजनैतिक हालातों में जब कांग्रेस राहुल केएजेंडे पर चल रही है तो महिला और यूथ का कॉंबिनेशन अनुपमा को ज्यादा ताकतवर बनाता है। हरीश रावत के चुनाव में उनकी अहम भूमिका थी और उसके बाद से लगातार सक्रिय रही हैं।