आबकारी विभाग पर गिरी थी गाज
आमतौर पर शराब बनाने के लिए एक निश्चित मात्रा में एथेनॉल का इस्तेमाल होता है, लेकिन अवैध शराब बनाने वाले एथेनॉल की जगह स्प्रिट, मिथाइल अल्कोहल, इथाइल अल्कोहल, यूरिया, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं। इससे नशा अधिक होता है और लागत कम आती है।
शिव नगर ग्राम पंचायत के चर्चित शराब कांड में भी स्प्रिट से बनी शराब ही ग्रामीणों को बांटी और परोसी गई थी। शराब पीने से 12 लोगों की मौत से प्रदेशभर में हड़कंप मच गया था और कई लोग बीमार हुए थे। शिव नगर ग्राम पंचायत के फूलगढ़, शिवगढ़ और दुर्गागढ़ गांव के 12 लोगों की मौत पर तत्कालीन एसओ समेत कई पुलिसकर्मियों और आबकारी विभाग पर गाज गिरी थी।