मोहन भागवत ने कहा कि हम आज विश्व कल्याण के साथ भय मुक्त कामना की कल्पना करते हैं। सृष्टि का कल्याण केवल सनातन में है। ज्ञान भाषण से आचरण नहीं आता है।अगर एक शब्द का भी आचरण कर लिया जाए तो दुनिया में परिवर्तन आ सकता है। भगवान श्री राम इसलिए पुरुषोत्तम नहीं कहलाए, इसके लिए उन्होंने मर्यादाओं का पालन किया। कहा कि अगर हम अपना जीवन बदले तो दुनिया में बदलाव आएगा और भारत फिर से विश्वगुरु बनेगा। अकेला सनातन कल्याणकारी सनातन वर्ण का पालन करें तो दुनिया का भला होगा और हमारा भी भला होगा।