जगद्गुरु की दो टूक : राजनीति और धर्म को प्रोफेशन न मानें देश के नेता और धर्माचार्य
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय से शुक्रवार को चर्चा के दौरान जगद्गरु शंकराचार्य ने दो बड़े सुझाव दे दिए। उन्होंने न केवल राजनेताओं को नसीहत दी, बल्कि धर्माचार्याें से भी धर्म को प्रोफेशन नहीं बनाने की अपील की। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि जिसने देश के लिए समाज के लिए समर्पण के लिए काम शुरू किया वही सनातन धर्म और राजनीतिक दायित्व में समाहित है। इससे पुनरुत्थान के साथ-साथ अभ्युदय होगा। उन्होंने कहा कि जो हिंदूवादी मानसिकता है उसमें मंदिरों को सजाने संवारने के कारण आर्थिक साधनों को प्राप्त करने की धर्माचार्यों की लालसा बढ़ गई है। सनातन धर्म हिंदू धर्म ऋषियों का धर्म है, विलासियों का नहीं है।
इस धर्म में ऋषि परंपरा के संवाहक मनीषी अन्वेषक कर्ण, पिप्लादि, दधीची, विश्वामित्र, वशिष्ठ की ऐसी परंपरा रही है जिसने समाज के लिए सर्व समर्पण की बात कही है। उन्होंने कहा कि मेरा देश के धर्माचार्याें से आग्रह है कि आध्यात्मिक क्रांति के लिए अपने अनुयायियों से आग्रह करें, कि धर्म को प्रोफेशन नहीं मिशन मानकर कार्य करें। कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि नेता राजनीति को प्रोफेशन मान रहे हैं। वहीं धर्माचार्य भी आध्यात्म को प्रोफेशन मानकर काम कर रहे हैं।
स्वामी कैलाशानंद गिरी से लिया आशीर्वाद
हरिद्वार आए मध्य प्रदेश सरकार के नगरीय विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने श्री दक्षिण काली पहुंचकर मां काली की पूजा अर्चना की और निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज से आशीर्वाद लिया। स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने माता की चुनरी व नारियल भेंटकर तथा रूद्राक्ष की माला और शॉल ओढ़ाकर उन्हें आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी, बाल मुकुंदानंद ब्रह्मचारी मौजूद रहे। मा.सि.रि.