संसार का आत्मचिंतन और दर्शन ज्योतिष से ही संभव : आचार्य महामंडलेश्वर
निरंजनी पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ने कहा कि ज्योतिष आत्मचिंतन का माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस विधा के जरिए दर्शन भी संभव है। उन्होंने कहा कि नवग्रह और 27 नक्षत्र सभी रेखांश और अक्षांश पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि हम आज भी 12 बजे के बाद दूसरे दिन की गणना नहीं करते। सूर्याेदय से सूर्योदय के बीच हम दिन में परिवर्तन मानते हैं। उन्होंने कहा कि जिस जातक का जन्म होता है, उसे ही गणना के आधार पर ज्योतिष के माध्यम से भविष्य रचना की जानकारी की जाती है। उन्होंने कहा कि पुरातन काल से ही ज्योतिष की तीन विधा का प्रयोग होता आ रहा है। रमल ज्योतिष के माध्यम से फलादेश, अनुष्ठान आदि की जानकारी चक्र गणना के माध्यम से की जाती है। इसी तरह विकृति ज्योतिष और कृति ज्योतिष के ज्ञाता भी आज देश में बहुत हैं।
ग्रहों की चाल और काल की गणना से ही तय होता है भविष्य : श्रीमहंत
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि ज्योतिष विज्ञान है। इसके माध्यम से जातक के 12 घरों में 12 राशियों की ग्रहाें की चाल और काल की गणना की जाती है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष ऐसी विधा है कि इसके जरिए किसी जातक के भविष्य को बताया जाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की आंधी में आज हर कोई ज्योतिषाचार्य बन रहा है, लेकिन वास्तव में देश की इस प्राचीन विधा को सीखने के लिए संस्थानों में जाना होगा। वास्तविक ज्योतिषी ही किसी जातक के बारे में सही जानकारी दे सकता है। उन्होंने कहा कि ग्रह की चाल और काल की गणना ने कई बार देश के भविष्य को बताया है और इसके आधार पर ही राष्ट्र की रक्षा हो सकी है। इस विधा को अधिक से अधिक लोगों को सीखना होगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने ज्योतिषविदों को दिए प्रशस्ति पत्र
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने ज्योतिष सम्मेलन में शामिल होने आए देश-विदेश के ज्योतिषाचार्यों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने अपने जीवन के कई संस्मरण जो ज्योतिष से जुड़े हैं, उसे भी सभी के समक्ष रखा। सम्मानित होने वालों में सम्मेलन के संयोजक रमेश सेमवाल, आचार्य सुदेश शर्मा, वात्सल्य शर्मा, विश्व कुमार शर्मा, डॉ. ललित पंत, डॉ. कुमार गणेश, डॉ. लेखराज द्विवेदी, स्वामी देवानंद महाराज आदि शामिल रहे।