बालकृष्ण ने कहा कि उनके जो शोध और प्रमाण हैं उनको स्वीकार करें और मानें। प्रत्येक पैथी की सीमाओं को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके पास आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के कई डॉक्टर रोजाना आते हैं। हम उनसे कभी ये नहीं कहते हैं कि मार्डन सिस्टम वाले हमारे यहां क्यों आते हैं।
जो इलाज हमारे सामर्थ्य में है उसके लिए लोग हमारे पास आएंगे ही। गंभीर समस्या होने पर एलोपैथी में ही जाएंगे। कई बार हम खुद भी क्रिटिकल मैनेजमेंट वाले मरीजों को एलोपैथी चिकित्सकों के पास भेजते हैं।
उन्होंने कहा कि परस्पर सहयोग की भावना देश के अंदर बढ़े और जिन भी पद्धतियों से रोगों को ठीक कर सकते हैं किया जाए। आयुर्वेद की क्षमताओं को स्वीकार किया जाए। किसी भी पैथी से जुड़े चिकित्सक हों, लक्ष्य एक ही है। रोगी का हित सर्वोपरि मानते हुए इलाज और काम करना चाहिए।